छत्तीसगढ़

दहेज में चाहिए गैस सिलेंडर! छत्तीसगढ़ के होटल में लगा अनोखा बोर्ड, LPG संकट के बीच मैनेजर ने बताई मजबूरी

अंबिकापुर : छत्तीसगढ़ समेत देश के कई हिस्सों में एलपीजी की भारी किल्लत है. अंबिकापुर के एक होटल ने गैस संकट के कारण दहेज में कमर्शियल सिलेंडर लाने का व्यंग्यात्मक बोर्ड लगाया है। धमतरी में सर्वर डाउन होने से घरेलू उपभोक्ता परेशान हैं. गैस की कमी से होटल उद्योग और घरेलू रसोई पर संकट मंडरा रहा है। देश के कई हिस्सों में एलपीजी (LPG) सिलेंडरों की भारी किल्लत ने आम आदमी की रसोई से लेकर बड़े व्यापारिक आयोजनों तक हड़कंप मचा दिया है. इस संकट के बीच छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है. यहां एक स्थानीय होटल के बाहर लगा साइन बोर्ड इस किल्लत की गंभीरता को बड़ी ही व्यंग्यात्मक लेकिन कड़वी सच्चाई के साथ उजागर कर रहा है।

अंबिकापुर के एक होटल के बाहर लगे बोर्ड पर लिखा है- दुल्हन का दहेज: कमर्शियल गैस आपकी तरफ से, व्यवस्थाएं होटल की तरफ से. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, होटल प्रबंधन ने यह नोटिस इसलिए लगाया है क्योंकि वे शादियों की बुकिंग तो ले चुके हैं, लेकिन खाना पकाने के लिए उनके पास गैस नहीं है। होटल के मैनेजर पूर्णेंद्र मजूमदार का कहना है कि ये बोर्ड उनके संकट को बयां करता है। उन्होंने बताया- हम लगातार हिंदुस्तान पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल और विभिन्न एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर जगह से कोरा जवाब मिल रहा है। एजेंसियां नया स्टॉक देने में असमर्थता जता रही हैं।

…तो मजबूरन बंद करने पड़ेंगे होटल-रेस्टोरेंट

मैनेजर के मुताबिक, उनके पास मात्र एक या दो दिन का स्टॉक बचा है. यदि आपूर्ति जल्द बहाल नहीं हुई, तो मजबूरन होटल और रेस्टोरेंट बंद करने पड़ेंगे। बिना कमर्शियल सिलेंडर के शादियों जैसे बड़े आयोजनों के लिए खाना तैयार करना असंभव है. यह स्थिति केवल बड़े होटलों की नहीं, बल्कि स्ट्रीट फूड स्टॉल और छोटे कैटरर्स के लिए भी आजीविका का संकट बन गई है।

धमतरी में सर्वर डाउन, लाइनों में लगे लोग

वहीं, छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में भी हालात बदतर हैं. यहां घरेलू उपभोक्ता सुबह से ही गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं. उपभोक्ताओं का आरोप है कि ऑनलाइन बुकिंग करने पर सर्वर डाउन होने की बात कही जाती है. घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी कई बार महिलाओं और पुरुषों को खाली हाथ घर लौटना पड़ रहा है। घरेलू महिलाओं के लिए रसोई चलाना दूभर हो गया है, जिससे रोजमर्रा का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है. फिलहाल, प्रशासन और गैस कंपनियों की ओर से आपूर्ति बहाल करने को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है. आने वाले शादी-ब्याह के सीजन को देखते हुए लोग इस बात से डरे हुए हैं कि कहीं उन्हें चूल्हे या अन्य पुराने साधनों की ओर न लौटना पड़े।

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