
रायपुर। रायपुर विधानसभा के प्रश्नकाल में पर्यटन विभाग से जुड़ा एक अहम मुद्दा उस वक्त चर्चा में आया, जब रामकुमार टोप्पो ने सरगुजा जिले के मैनपाट में स्थित कर्मा एथेनिक रिसोर्ट को लेकर सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी।
रिसोर्ट की जमीन और लागत पर सवाल
विधायक रामकुमार टोप्पो ने सदन में सवाल उठाते हुए पूछा कि मैनपाट स्थित कर्मा एथेनिक रिसोर्ट किस मद के अंतर्गत विकसित किया गया है, यह कितनी भूमि पर स्थित है, और इसके डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) में किन-किन कार्यों को शामिल किया गया था।उन्होंने यह भी जानना चाहा कि इस प्रोजेक्ट पर कुल कितनी राशि खर्च की गई और वर्तमान में इसके रखरखाव पर कितना खर्च किया जा रहा है।
पर्यटन मंत्री का जवाब
इस पर जवाब देते हुए पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने सदन को जानकारी दी कि मैनपाट का कर्मा एथेनिक रिसोर्ट “पहाड़ एवं चट्टान” मद के अंतर्गत विकसित किया गया है।उन्होंने बताया कि यह रिसोर्ट 8 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में फैला हुआ है और इसके निर्माण में 21 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आई है।
DPR में शामिल 25 से अधिक कार्य
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रोजेक्ट की डीपीआर में 25 से अधिक विभिन्न कार्यों को शामिल किया गया था। इनमें बुनियादी ढांचा, पर्यटकों के लिए सुविधाएं, आवास व्यवस्था, सौंदर्यीकरण और अन्य पर्यटन विकास से जुड़े कार्य शामिल हैं।इससे यह स्पष्ट होता है कि यह प्रोजेक्ट केवल एक रिसोर्ट नहीं, बल्कि एक समग्र पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया गया है।
मेंटेनेंस पर भी हुआ खुलासा
सदन में रिसोर्ट के रखरखाव (मेंटेनेंस) को लेकर भी जानकारी सामने आई। मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि जनवरी 2026 में रिसोर्ट के मासिक रखरखाव के लिए 67,630 रुपये खर्च किए गए।यह आंकड़ा यह दर्शाता है कि प्रोजेक्ट के संचालन और रखरखाव के लिए भी नियमित रूप से बजट निर्धारित किया जा रहा है।
पर्यटन विकास बनाम खर्च पर बहस
इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान यह सवाल भी उठने लगे कि क्या इतनी बड़ी लागत से बने प्रोजेक्ट्स से अपेक्षित पर्यटन लाभ मिल रहा है या नहीं।मैनपाट को “छत्तीसगढ़ का शिमला” कहा जाता है और यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, ऐसे में कर्मा एथेनिक रिसोर्ट जैसे प्रोजेक्ट्स राज्य के पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।हालांकि, विपक्ष और कुछ विधायकों का मानना है कि ऐसे प्रोजेक्ट्स की उपयोगिता और आय-व्यय का समय-समय पर मूल्यांकन जरूरी है, ताकि सरकारी धन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।



