गरियाबंदछत्तीसगढ़

गरियाबंद में प्रसूता और नवजात के मौत पर बड़ा एक्शन, कलेक्टर ने निजी हास्पिटल का लाइसेंस किया निलंबित

गरियाबंद। गरियाबंद जिले में आदिवासी प्रसूता और नवजात की मौत के मामले में जिला प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया है। स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट में अस्पताल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आई थी। अस्पताल को प्रसूति सेवाओं के लिए विधिवत अधिकृत नहीं किया गया था, न ही नर्सिंग होम एक्ट के तहत आवश्यक अनुमति ली गई थी। जांच में हुए इस खुलासे के बाद लक्ष्मीनारायणा हॉस्पिटल का लाइसेंस निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई कलेक्टर के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई।

जानकारी के मुताबिक ये पूरा मामला छुरा ब्लाॅक के लक्ष्मीनारायण हाॅस्पिटल का है। बताया जा रहा है कि 23 जनवरी 2026 को एक गर्भवती आदिवासी महिला को अस्पताल में प्रसव के लिए परिजनों ने भर्ती कराया गया था। जहां इलाज के दौरान महिला और नवजात की मौत हो गई थी। जिसके बाद परिजनों ने इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप अस्पताल प्रबंधन पर लगाया था। घटना की जानकरी के बाद कलेक्टर ने इस घटना की जांच का आदेश दिया था। स्वास्थ्य विभाग की जांच में कई गंभीर खामियां सामने आईं। जांच रिपोर्ट के मुताबिक अस्पताल को प्रसूति सेवाओं के लिए विधिवत अधिकृत नहीं किया गया था, न ही नर्सिंग होम एक्ट के तहत आवश्यक अनुमति ली गई थी।

इसके अलावा संस्थान में 24ग7 स्त्री रोग विशेषज्ञ की उपलब्धता भी नहीं पाई गई। बावजूद इसके अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को भर्ती किया गया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि मरीज को 23 जनवरी की रात 8ः57 बजे भर्ती किया गया, लेकिन ऑपरेशन देर रात करीब 12ः25 बजे शुरू हुआ। मतलब भर्ती और सर्जरी के बीच करीब साढ़े तीन घंटे का अंतर रहा, जो अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को दर्शाता है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में यह भी सामने आया कि प्रसव जटिल था और तत्काल सिजेरियन की जरूरत थी। लेकिन अस्पताल प्रबंधन द्वारा ऑपरेशन में देरी की गई, जिससे स्थिति गंभीर हो गई।

और प्रसूता और नवजात की मौत हो गयी। इस खुलासे के बाद जिला प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर गरियाबंद कलेक्टर के निर्देश पर लक्ष्मीनारायणा हॉस्पिटल के विरूद्ध लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई की गई। आपको बता दे इससे पहले भी अस्पताल पर गंभीर लापरवाही के आरोप लग चुके हैं और पूर्व में भी एक बार अस्पताल को सील किया जा चुका है। ऐसे में इस कार्रवाई के साथ प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

 

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