
CISF के दक्षिण जोन-II के तहत आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और उत्तरी कर्नाटक के कई महत्वपूर्ण औद्योगिक और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आती है। इसके अलावा बंगाल और ओडिशा के कुछ प्रमुख बंदरगाहों की सुरक्षा भी इसी जोन के अंतर्गत आती है। ऐसे में यह पद न केवल प्रशासनिक दृष्टि से बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
Central Industrial Security Force देश की प्रमुख केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों में से एक है, जो औद्योगिक प्रतिष्ठानों, हवाई अड्डों, परमाणु संयंत्रों, सरकारी इमारतों और संसद जैसे संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। हाल के वर्षों में CISF को देश के प्रमुख बंदरगाहों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है, जिससे इसकी भूमिका और भी व्यापक हो गई है।
आईपीएस संतोष सिंह इससे पहले रायपुर जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनके कार्यकाल के दौरान शहर में अपराध और नशे के खिलाफ कई प्रभावी अभियान चलाए गए। विशेष रूप से उनका ‘निजात अभियान’ काफी चर्चा में रहा, जिसका उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से जागरूक करना और समाज को नशा मुक्त बनाना था।
इस अभियान को न केवल प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली। ‘निजात अभियान’ की सफलता और प्रभाव को देखते हुए संतोष सिंह को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी किया गया। उन्हें प्रतिष्ठित ISCP अवार्ड से नवाजा गया, जो अपराध नियंत्रण और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को दिया जाता है।
उनकी कार्यशैली में सख्ती और संवेदनशीलता का संतुलन देखने को मिलता है, जिसने उन्हें एक प्रभावी और जनहितैषी अधिकारी के रूप में स्थापित किया है। अब CISF में नई जिम्मेदारी के साथ उनसे यह अपेक्षा की जा रही है कि वे अपने अनुभव और नेतृत्व क्षमता के दम पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि संतोष सिंह जैसे अनुभवी अधिकारी की नियुक्ति से दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण औद्योगिक और रणनीतिक संस्थानों की सुरक्षा में और मजबूती आएगी। यह नियुक्ति न केवल उनके व्यक्तिगत करियर के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि छत्तीसगढ़ कैडर के लिए भी गर्व की बात है।




