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अगर दोस्त या रिश्तेदार मांग रहे हैं उधार पैसा और रिश्ता दोनों बचाने के लिए अपनाएं ये 5 तरीका…

नई दिल्ली :  हम सभी के जीवन में कभी न कभी ऐसा मौका आता है जब कोई करीबी दोस्त या रिश्तेदार हमसे आर्थिक मदद मांगता है। किसी की मुसीबत में काम आना इंसानियत है, लेकिन अक्सर यही ‘उधार’ गहरे रिश्तों में दरार की वजह बन जाता है। सर्वे बताते हैं कि 10 में से 9 मामलों में निजी तौर पर दिया गया उधार वापस नहीं मिलता।

अगर आप भी किसी को पैसा देने की सोच रहे हैं, तो इन मनोवैज्ञानिक और फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर जान लें, ताकि आपका पैसा डूबे नहीं और रिश्ता भी सलामत रहे।

भावनाओं में बहकर तुरंत फैसला न लें

वित्तीय थेरेपिस्ट मैगी बेकर के अनुसार, बड़ा लोन देने से पहले सोचने के लिए समय मांगें। अपने पार्टनर या परिवार से चर्चा करें क्योंकि यह आपके घर के बजट का हिस्सा है। जल्दबाजी में लिया गया फैसला बाद में मानसिक तनाव का कारण बनता है।

‘लोन ऑफिसर’ की तरह स्पष्ट रहें

जब आप किसी को पैसा देते हैं, तो आप सिर्फ दोस्त नहीं, बल्कि एक ‘लोन ऑफिसर’ बन जाते हैं। पैसा देने से पहले ही वापसी की तारीख और किश्तें तय कर लें। भले ही कानूनी स्टाम्प न हो, लेकिन एक कागज पर तारीख और रकम लिखकर दोनों के पास रखें। स्पष्टता होने पर भविष्य में हिचकिचाहट या शर्मिंदगी नहीं होती।

उतना ही दें, जितना ‘भूलने’ की हिम्मत हो

फाइनेंशियल साइकोलॉजिस्ट ब्रैड क्लॉन्ट्ज का मानना है कि किसी को उधार देते समय मन में यह मान लें कि शायद यह पैसा वापस नहीं मिलेगा। उतना ही पैसा उधार दें जिससे न मिलने पर आपकी अपनी आर्थिक स्थिति या मानसिक शांति पर बुरा असर न पड़े।

बार-बार की मदद से बचें

अगर कोई व्यक्ति बार-बार घर के किराए या बिल के नाम पर आपसे मदद मांग रहा है, तो समझ जाएं कि यह एक आदत बन चुकी है। ऐसे में ‘ना’ कहना सीखें। शुरू में ही साफ कर दें कि आप हर बार बिल नहीं भर सकते। स्पष्ट बात करने से रिश्ता सुरक्षित रहता है।

बैंक का विकल्प सुझाएं

यदि रकम बहुत बड़ी है और आप जोखिम नहीं लेना चाहते, तो उन्हें बैंक से लोन लेने की सलाह देना सबसे बेहतर विकल्प है। बहुत बड़ी रकम के लिए प्रोफेशनल कॉन्ट्रैक्ट और मामूली ब्याज की बात करना भी बुरा नहीं है, क्योंकि यह उधार लेने वाले को जवाबदेह बनाता है।

विशेषज्ञों की चेतावनी

उधार लेने वाला व्यक्ति अक्सर आपके पैसे लौटाने के बजाय अपने अन्य खर्चों को प्राथमिकता देता है क्योंकि उसे लगता है कि आप ‘अपने’ हैं और आपको जल्दी नहीं होगी। यही सोच आगे चलकर रिश्तों में कड़वाहट पैदा करती है। इसलिए, रिश्ता अपनी जगह और पैसा अपनी जगह।

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