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क्या आपकी सुबह की कॉफी बचा रही है आपको डिमेंशिया से? नई रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा

हेल्थ अपडेट: भागदौड़ भरी जिंदगी में सुबह की एक प्याली कॉफी न केवल आपकी सुस्ती भगाती है, बल्कि यह आपके दिमाग को ताउम्र जवान रखने में भी मदद कर सकती है। वैज्ञानिक अध्ययनों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार, रोजाना दो से तीन कप कॉफी का सेवन करने वाले वयस्कों में उम्र के साथ होने वाली भूलने की बीमारी यानी डिमेंशिया का खतरा उन लोगों की तुलना में काफी कम पाया गया है जो कॉफी नहीं पीते।

रिसर्च के नतीजे: कैफीन और दिमाग का संबंध
अध्ययन के मुताबिक, कॉफी में मौजूद कैफीन और एंटीऑक्सीडेंट्स मस्तिष्क की कोशिकाओं को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि नियमित संतुलित मात्रा में कैफीन का सेवन मस्तिष्क में उन ‘टाऊ प्रोटीन’ को जमा होने से रोकता है, जो अल्जाइमर और डिमेंशिया के मुख्य कारक माने जाते हैं। यह शोध विशेष रूप से उन लोगों पर केंद्रित था जो मध्यम आयु वर्ग (45-60 वर्ष) में हैं और नियमित रूप से एस्प्रेसो या कैपेचीनो का सेवन करते हैं।

विशेषज्ञों की राय और आधिकारिक बयान
“कॉफी में मौजूद बायोएक्टिव कंपाउंड्स न्यूरोप्रोटेक्टिव एजेंट के रूप में काम करते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आप अत्यधिक मात्रा में कॉफी पीना शुरू कर दें। चीनी और क्रीम के बिना ब्लैक कॉफी या कम दूध वाली कॉफी सबसे अधिक प्रभावी साबित होती है।”

नागरिकों के लिए जरूरी सलाह: क्या ध्यान रखें?
भले ही कॉफी के फायदे सामने आए हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कुछ सावधानियां बरतने की भी सलाह दी है। यदि आप अनिद्रा (Insomnia), हाई ब्लड प्रेशर या एसिडिटी की समस्या से जूझ रहे हैं, तो कैफीन का सेवन बढ़ाने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। शहर के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों ने भी यह स्पष्ट किया है कि केवल कॉफी पीना ही पर्याप्त नहीं है; डिमेंशिया से बचने के लिए नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और मानसिक सक्रियता (जैसे पहेलियां सुलझाना या पढ़ना) भी उतनी ही अनिवार्य है।

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