नई दिल्ली। केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार के बाद अब भाजपा और राजग (NDA) शासित राज्यों में भी समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। केंद्रीय गृह मंत्री ने एक बड़ा ऐतिहासिक ऐलान करते हुए कहा है कि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले देश के 21 राज्यों में पर्सनल लॉ की जगह एकीकृत नागरिक संहिता पूरी तरह प्रभावी हो जाएगी। गृह मंत्री ने उत्तराखंड में यूसीसी के सफल क्रियान्वयन को एक आदर्श मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया है।
उत्तराखंड बना मॉडल, कई राज्यों में तैयारी अंतिम दौर में
वर्तमान में उत्तराखंड समान नागरिक संहिता कानून को लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन चुका है। वहीं, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और असम जैसे भाजपा शासित राज्यों में इसके कानूनी मसौदे (Drafting) और प्रक्रिया का काम अपने अंतिम चरणों में पहुंच चुका है, जिसके बाद इसे जल्द ही धरातल पर उतारा जाएगा।
UCC लागू होने से क्या बदलेगा?
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के प्रभावी होने के बाद देश के नागरिकों के लिए विवाह, तलाक और संपत्ति जैसे निजी मामलों में धर्म के आधार पर बने अलग-अलग कानून पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे। इसके तहत निम्नलिखित क्षेत्रों में एक समान नियम लागू होंगे:
- विवाह की न्यूनतम उम्र: सभी धर्मों के लिए शादी की कानूनी उम्र एक समान होगी।
- तलाक की प्रक्रिया: तलाक के लिए सभी नागरिकों को एक जैसी कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।
- बच्चा गोद लेने के नियम: गोद लेने की प्रक्रिया को सरल और सार्वभौमिक बनाया जाएगा।
- पैतृक संपत्ति में अधिकार: संपत्ति के उत्तराधिकार में लैंगिक समानता और एक समान अधिकार सुनिश्चित किए जाएंगे।
आदिवासी (ST) समुदायों को बड़ी राहत, दायरे से रहेंगे बाहर
गृह मंत्री ने इस कानून को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि यूसीसी के दायरे से पूर्वोत्तर के राज्यों और देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले आदिवासी (ST) समुदायों को बाहर रखा जाएगा।
आदिवासी समाज के पारंपरिक रीति-रिवाजों, रूढ़िवादी अधिकारों और उनकी सांस्कृतिक स्वायत्तता से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। सरकार का यह फैसला जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।




