रायपुर: छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रहे कैंसर के मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। सरकार ने कैंसर को ‘नोटिफाइड डिजीज’ (अधिसूचित बीमारी) घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद अब राज्य के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों, डायग्नोस्टिक सेंटरों और कैंसर केयर सेंटरों के लिए हर एक कैंसर मरीज की जानकारी सरकार को देना अनिवार्य हो गया है। मरीज में कैंसर की पुष्टि होने या संदिग्ध मामला सामने आने के 1 महीने के भीतर इसकी रिपोर्टिंग करनी होगी।
ढाई साल में सामने आए 17,611 मामले
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में 1 अप्रैल 2024 से जून 2026 के बीच कैंसर के कुल 17,611 मामले दर्ज किए गए हैं। यह आंकड़ा स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए बेहद चिंताजनक है। राज्य में मिल रहे कैंसर के मामलों का वर्गीकरण इस प्रकार है:
- स्तन कैंसर: 2,633 मामले
- पेट का कैंसर: 2,560 मामले
- गर्भाशय का कैंसर: 2,200 मामले
- फेफड़ों का कैंसर: 1,038 मामले
- मुख (ओरल) कैंसर: 4,465 मामले
- जीभ का कैंसर: 252 मामले
- गले का कैंसर: 210 मामले
- अन्य प्रकार के कैंसर: 4,253 मामले
सरकार को क्यों लेना पड़ा यह फैसला?
छत्तीसगढ़ में कैंसर मरीजों का डेटा ‘कैंसर रजिस्ट्री’ में स्वेच्छा (Voluntary) से दर्ज कराया जाता था। इस वजह से कई मरीज और उनके मामले रिकॉर्ड में ही नहीं आ पाते थे।
सरकार द्वारा कैंसर को अधिसूचित बीमारी बनाने के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- सटीक डेटा का अभाव: स्वैच्छिक रिपोर्टिंग के कारण सरकार के पास बीमारी की गंभीरता का सही आंकड़ा नहीं मिल पा रहा था।
- शुरुआती पहचान और इलाज: सही समय पर सटीक डेटा मिलने से सरकार कैंसर हॉटस्पॉट की पहचान कर पाएगी और शुरुआती स्टेज में ही मरीजों की स्क्रीनिंग और इलाज शुरू किया जा सकेगा।
- सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी देश के राज्यों को कैंसर को ‘नोटिफाइड डिजीज’ घोषित करने के निर्देश दिए थे, ताकि मरीजों की बेहतर देखभाल और शुरुआती पहचान सुनिश्चित की जा सके।
स्वास्थ्य ढांचे में बदलाव की तैयारी
इस फैसले के बाद अब स्वास्थ्य विभाग जिला स्तर पर डिस्ट्रिक्ट कैंसर केयर क्लिनिक (DCCC) का विस्तार कर रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक स्क्रीनिंग को बढ़ाया जा रहा है। इस कदम से न सिर्फ कैंसर के सही आंकड़े सामने आएंगे, बल्कि सरकार को कैंसर की रोकथाम, इसके कारणों का पता लगाने और मुफ्त या रियायती इलाज की योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने में मदद मिलेगी।




