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पत्नी के पार्थिव शरीर के पास पूरी रात मदद की आस में बैठा रहा असहाय बुजुर्ग

  • रायपुर रोड किनारे पेड़ के नीचे झोपड़ी बनाकर रहता है बुजुर्ग

खरोरा। आंखों में आंसू, सामने पत्नी का पार्थिव शरीर और मन में सिर्फ एक सवाल-अब अंतिम संस्कार कौन करेगा? खरोरा नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 08 में सामने आया यह मार्मिक दृश्य मानवता को झकझोर देने वाला रहा। असहाय बुजुर्ग गुलाब राम गेन्ड्रे अपनी पत्नी ज्योतिष गेन्ड्रे के पार्थिव शरीर के पास पूरी रात मदद की आस में बैठे रहे। सुबह जब जनप्रतिनिधियों को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने तत्काल मौके पर पहुंचकर न केवल सहारा दिया, बल्कि स्वयं अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी भी निभाई।

रायपुर रोड किनारे पेड़ के नीचे झोपड़ी बनाकर मेहनत-मजदूरी से जीवन गुजारने वाले बुजुर्ग दंपती ज्योतिष गेन्ड्रे और गुलाब राम गेन्ड्रे का जीवन उस समय दुखों से भर गया, जब दो दिन पूर्व ज्योतिष गेन्ड्रे की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें उपचार के लिए रायपुर स्थित मेकाहारा अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।रात में एंबुलेंस से शव खरोरा पहुंचा, लेकिन अंतिम संस्कार की व्यवस्था करने वाला कोई नहीं था। परिवार में अन्य सदस्य नहीं होने के कारण शारीरिक रूप से असहाय गुलाब राम गेन्ड्रे पूरी रात पत्नी के पार्थिव शरीर के पास बैठे रहे। रात से लेकर अगली सुबह करीब 11 बजे तक वे आने जाने वाले लोगों को उम्मीद भरी नजरों से देखते रहे। अगली सुबह गाय-भैंस चराने पहुंचे किसान विजय यादव की नजर इस मार्मिक स्थिति पर पड़ी। उन्होंने तत्काल इसकी सूचना संबंधित पार्षद को दी। जानकारी मिलते ही वार्ड क्रमांक 01 के पार्षद सुरेंद्र गिलहरे, वार्ड क्रमांक 07 के

पार्षद जयप्रकाश वर्मा और वार्ड क्रमांक 05 के पार्षद शेखर देवांगन मौके पर पहुंचे। तीनों पार्षदों ने स्थिति को समझते हुए तत्काल थाना एवं नगर पंचायत को सूचना दी। आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी कराने के बाद उन्होंने स्वयं मृतका के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई।

जनप्रतिनिधियों ने दिया सहारा, खुद निभाया अंतिम फर्ज, आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद लाली डबरी स्थित मुक्तिधाम में ज्योतिष गेन्ड्रे का अंतिम संस्कार कराया गया। इस दौरान पार्षदों ने स्वयं आगे बढ़कर अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था में सहयोग किया और असहाय गुलाब राम गेन्ड्रे के साथ खड़े रहे। पत्नी को खो चुके गुलाब राम गेन्ड्रे इस दौरान भावुक होकर फूट-फूटकर रो पड़े। उन्होंने तीनों पार्षदों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया और आशीर्वाद दिया। यह घटना महज एक अंतिम संस्कार की कहानी नहीं, बल्कि उस समय मानवता के साथ खड़े होने की मिसाल है, जब एक असहाय को सबसे अधिक सहारे की जरूरत थी।

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