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11 से 20 अक्टूबर ग्रहों का बड़ा महाफेर! जानिए क्यों इस नवरात्रि माँ दुर्गा की भक्ति ही है एकमात्र महासुरक्षा कवच

11 से 20 अक्टूबर के बीच आकाश मंडल में एक साथ कई बड़े ग्रहीय फेरबदल होने जा रहे हैं। एक तरफ जहाँ सूर्य अपनी नीच राशि में प्रवेश करेंगे, वहीं मंगल नीच अवस्था में और शनि-शुक्र वक्री गति से गोचर करेंगे। जब ब्रह्मांड में इतनी शक्तिशाली और विरोधाभासी ऊर्जाओं का टकराव हो रहा हो, तब इसका सीधा असर हमारे जीवन, स्वास्थ्य, करियर और मानसिक शांति पर पड़ता है। लेकिन सौभाग्य से, यह ग्रहीय उथल-पुथल शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व के साथ पड़ रही है। ऐसे समय में जगज्जननी माँ दुर्गा की भक्ति केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन को हर संकट से बचाने वाला ‘दिव्य सुरक्षा चक्र’ बन जाती है।

आइए समझते हैं कि ग्रहों की इस दुर्लभ स्थिति में माँ दुर्गा की उपासना आपके जीवन को कैसे बदल सकती है:

  1. नीच सूर्य और घटता आत्मविश्वास: माँ शैलपुत्री व सिद्धिदात्री देंगी ‘आत्मबल’

ग्रहीय स्थिति: 17 अक्टूबर को सूर्य तुला राशि (अपनी नीच राशि) में संक्रांति करेंगे। सूर्य आत्मा, स्वास्थ्य और सम्मान के कारक हैं। सूर्य के नीच होने से मानसिक तनाव, निर्णय लेने में भ्रम और मान-सम्मान में कमी जैसी चुनौतियां आती हैं।
भक्ति का प्रभाव: माँ दुर्गा स्वयं ‘तेजोमयी’ और अग्नि स्वरूप हैं। नवरात्रि के दौरान माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करने से साधक के भीतर का सूर्य तत्व जागृत होता है, जिससे नीच सूर्य का प्रभाव निष्फल हो जाता है और आत्मविश्वास मजबूत रहता है।

  1. नीच मंगल का क्रोध और वक्री शनि का दबाव: केवल ‘महिषासुरमर्दिनी’ करेंगी शांत

ग्रहीय स्थिति: इस अवधि में मंगल ग्रह कर्क राशि में नीच के रहेंगे (जो अकारण क्रोध, विवाद और दुर्घटना के कारक हैं) तथा शनि मीन राशि में वक्री होकर कार्यों में बाधा व तनाव पैदा करेंगे।
भक्ति का प्रभाव: सिंह वाहिनी माँ दुर्गा का ‘महिषासुरमर्दिनी’ रूप निडरता और धैर्य का प्रतीक है। जब आप माँ दुर्गा की शरण में जाते हैं, तो मंगल का अकारण भय व शनि का मानसिक दबाव दोनों शांत हो जाते हैं।

  1. तुला राशि में त्रिग्रही युति और धन का संकट: त्रिदेवी की कृपा से मिलेगा समाधान

ग्रहीय स्थिति: 17 अक्टूबर से तुला राशि में सूर्य, बुध और वक्री शुक्र की युति बनेगी। यद्यपि इससे ‘शुक्रादित्य योग’ बनेगा, लेकिन शुक्र के वक्री होने के कारण पैसों के लेन-देन में नुकसान और गलत व्यावसायिक निर्णयों का जोखिम रहेगा।
भक्ति का प्रभाव: माँ दुर्गा त्रिगुणात्मक शक्ति हैं—
माँ महाकाली: भय और नकारात्मकता का नाश करती हैं।
माँ महालक्ष्मी: धन, समृद्धि और सही व्यावसायिक निर्णय प्रदान करती हैं।
माँ महासरस्वती: सद्बुद्धि और विवेक देती हैं।
इन तीनों शक्तियों की उपासना से व्यापारिक नुकसान से बचाव होता है और नए अवसर खुलते हैं।

  1. राहु-केतु का भ्रम और नवरात्रि का ‘सुरक्षा चक्र’

राहु (कुंभ राशि) और केतु (सिंह राशि) का प्रभाव मन में अज्ञात भय और चिंता उत्पन्न करता है। नवरात्रि की रात्रियों में किया गया ‘दुर्गा सप्तशती’ का पाठ या “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र का जप राहु-केतु के दुष्प्रभावों को जड़ से समाप्त कर देता है।
💡 इस दौरान क्या करें? (विशेष नवरात्रि महाउपाय)
अखंड ज्योति जलाएं: घर के ईशान कोण में देसी घी का दीपक जलाकर माँ भगवती का ध्यान करें।
दुर्गा कवच का पाठ: प्रतिदिन दुर्गा कवच या सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें।
लाल पुष्प अर्पित करें: माँ दुर्गा को गुड़हल या लाल गुलाब के फूल चढ़ाएं।

🎯 निष्कर्ष (Conclusion)

11 से 20 अक्टूबर के बीच भले ही ब्रह्मांड में ग्रहों की चाल उथल-पुथल मचा रही हो, लेकिन जो साधक माँ भगवती के चरणों में समर्पित रहता है, उस पर किसी भी ग्रह का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।

“शरणागत दीनार्तं परित्राण परायणे। सर्वस्यार्ति हरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥”

इस नवरात्रि माँ दुर्गा के चरणों में दीपक जलाएं, भक्ति करें और अपने परिवार के लिए सुख, समृद्धि व सुरक्षा का आशीर्वाद पाएं।

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आचार्य पं गिरीश पाण्डेय
एस्ट्रोसेज पैनल मेंबर
अमरैया पारा पिथौरा महासमुंद (छत्तीसगढ़)
☎️ 7000217167

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