रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में साइबर ठगी का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ गंज थाना क्षेत्र में जालसाजों ने एक 62 वर्षीय बुजुर्ग महिला को 5 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर ₹7 लाख की मोटी रकम ऐंठ ली। ठगों ने महिला को मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे केस में फंसाने और गिरफ्तारी वारंट का डर दिखाकर इस वारदात को अंजाम दिया।
खुद को बताया NIA का अधिकारी
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, ठगों ने खुद को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का अधिकारी ‘विक्रम सिंह’ बताया। उन्होंने महिला से संपर्क कर धमकी दी कि उनके आधार कार्ड का दुरुपयोग करके एक फर्जी बैंक खाता खोला गया है। आरोपियों ने दावा किया कि इस खाते में मनी लॉन्ड्रिंग (काले धन की हेराफेरी) की भारी रकम आई है और उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है।
वीडियो कॉल पर दबाव, 5 दिन तक बंधक जैसी स्थिति
जालसाज लगातार महिला पर वीडियो कॉल के जरिए मानसिक दबाव बनाते रहे और उन्हें 5 दिनों तक अपने घर में ही डिजिटल अरेस्ट (कथित तौर पर निगरानी में) रहने पर मजबूर किया। इस दौरान महिला को किसी से भी बात करने या संपर्क करने की सख्त मनाही थी। गिरफ्तारी के खौफ में आकर महिला ने ठगों के कहे अनुसार अपने बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) तुड़वा ली।
RTGS के जरिए ट्रांसफर कराए ₹7 लाख
आरोपियों ने महिला से आरटीजीएस (RTGS) फॉर्म भरवाया और बैंक खाते में जमा पूंजी को ‘महाकाली मेटल’ नाम के एक बैंक खाते में ट्रांसफर करवा लिया। महिला ने कुल ₹7,00,000 की राशि आरोपियों के बताए खाते में भेज दी।
NOC नहीं मिलने पर हुआ ठगी का अहसास
रकम ट्रांसफर करने के बाद जब ठगों की तरफ से कोई रिस्पॉन्स नहीं आया और मामले की कथित क्लीन चिट या ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) नहीं मिली, तब पीड़िता को अपने साथ हुई ठगी का अहसास हुआ। इसके तुरंत बाद महिला ने अपने परिजनों को आपबीती सुनाई और थाने जाकर शिकायत दर्ज कराई।
गंज थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ साइबर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है और ट्रांजैक्शन डिटेल्स के आधार पर बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच शुरू कर दी है।



