कुरुद। देशभर में दीपावली का त्योहार पंचांग और तय कैलेंडर के अनुसार मनाया जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में एक ऐसा अनोखा गांव भी है जहां परंपराएं कैलेंडर पर भारी पड़ती हैं। भखारा तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम सेमरा में हर साल देश के बाकी हिस्सों से करीब सात दिन पहले ही दिवाली मना ली जाती है।
वर्षों से चली आ रही इस अनूठी परंपरा का पालन ग्रामीण आज भी पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ कर रहे हैं।
ग्राम देवता की अनुमति से तय होते हैं त्योहार
सेमरा गांव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ किसी भी त्योहार की तारीख कैलेंडर देखकर नहीं, बल्कि परंपरा के मोर्चे पर तय की जाती है। गांव में किसी भी पर्व की शुरुआत यहाँ के ग्राम देवता ‘सिरदार देव’ की विशेष पूजा-अर्चना और उनकी अनुमति के बाद ही होती है। देव आदेश के बाद ही पूरा गांव एक साथ उत्सव के रंग में डूब जाता है।
क्यों खास है यह परंपरा?
- हफ़्ते भर पहले जश्न: जब पूरा देश दिवाली की तैयारियों में जुटा होता है, तब सेमरा गांव में दीये जल चुके होते हैं और त्योहार संपन्न हो जाता है।
- अटूट आस्था: आधुनिक दौर में भी रूढ़ियों से अलग, प्रकृति और लोक-देवताओं पर आधारित यह परंपरा ग्रामीणों की अटूट आस्था को दर्शाती है।
- सामूहिक निर्णय: त्योहार मनाने की तिथि का निर्णय केवल कुछ लोग नहीं, बल्कि सिरदार देव की पूजा के बाद पूरा गांव सामूहिक रूप से स्वीकार करता है।
कैलेंडर और पंचांग से इतर लोक-संस्कृति को सहेज कर रखने वाला यह गांव आज भी अपनी इस अनूठी विरासत के लिए पूरे प्रदेश में कौतूहल और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।



