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छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण विधेयक 2026: आम जनता से मांगे गए सुझाव, डॉ. राकेश गुप्ता ने प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए गृह सचिव को लिखा पत्र

रायपुर, 8 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रस्तावित छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण विधेयक, 2026 का प्रारूप (Draft) जारी कर दिया गया है। इस नए कानून के मसौदे पर राज्य सरकार ने आम जनता से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियाँ आमंत्रित की हैं। नागरिकों की सुविधा के लिए इस विधेयक का हिंदी और अंग्रेजी प्रारूप छत्तीसगढ़ पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया है।

शासन के इस फैसले पर राज्य के प्रसिद्ध ENT विशेषज्ञ और समाजसेवी डॉ. राकेश गुप्ता ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रमुख सचिव (गृह एवं जेल विभाग) को एक पत्र भेजकर जनता से राय लेने के कदम का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही वर्तमान प्रक्रिया को आम नागरिकों के लिए जटिल बताया है।

सुझाव आमंत्रित करना स्वागत योग्य, लेकिन प्रक्रिया बेहद कठिन: डॉ. राकेश गुप्ता

डॉ. राकेश गुप्ता ने अपने पत्र में लिखा कि कानून निर्माण में आम जनता की भागीदारी सुनिश्चित करना निश्चित रूप से एक सराहनीय और स्वागत योग्य कदम है। इससे नागरिकों को प्रस्तावित कानून के संबंध में अपनी बात रखने और लोकतंत्र में अपनी भागीदारी दर्ज कराने का सीधा अवसर मिलता है।

हालांकि, उन्होंने प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरीके से वर्तमान में आपत्तियाँ और सुझाव मांगे गए हैं, वह एक सामान्य नागरिक के लिए काफी कठिन और असुविधाजनक है। वेबसाइट से प्रारूप ढूंढना और उस पर तकनीकी रूप से सुझाव देना हर वर्ग के लिए आसान नहीं है।

प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग

डॉ. राकेश गुप्ता ने प्रमुख सचिव से मांग की है कि यदि शासन वास्तव में जमीनी स्तर पर अधिक से अधिक लोगों से सुझाव और प्रतिक्रियाएं चाहता है, तो इस पूरी प्रक्रिया को बेहद सरल और सुगम बनाया जाना चाहिए। प्रक्रिया इतनी आसान होनी चाहिए कि राज्य का एक सामान्य नागरिक भी बिना किसी प्रशासनिक या तकनीकी कठिनाई के विधेयक को आसानी से देख सके, समझ सके और अपने सुझाव शासन तक पहुंचा सके।

क्या है छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण विधेयक, 2026?

यह विधेयक राज्य में ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution), लाउडस्पीकरों के अनियंत्रित उपयोग, डीजे और सार्वजनिक स्थानों पर होने वाले अत्यधिक शोर-शराबे को रोकने और उसे कानूनी दायरे में लाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। राज्य के नागरिक अगले 30 दिनों के भीतर छत्तीसगढ़ पुलिस की वेबसाइट पर जाकर इसका अध्ययन कर सकते हैं और अपनी आपत्तियाँ दर्ज करा सकते हैं।

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