हरियाली तीज 2026: सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला हरियाली तीज का पर्व आज, 15 अगस्त 2026 को पूरे देश में पारंपरिक श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। सुहागिन महिलाओं के अखंड सौभाग्य और कुंवारी कन्याओं के सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इसी दिन मां पार्वती की कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया था।
शुभ मुहूर्त और तिथि का समय
वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 14 अगस्त को शाम 06 बजकर 47 मिनट पर शुरू हो चुकी है, जो 15 अगस्त को शाम 05 बजकर 29 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के मान के अनुसार तीज का व्रत और पूजन आज 15 अगस्त को ही संपन्न किया जा रहा है।
दिनभर पूजन के प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:00 बजे से 05:41 बजे तक
- अमृत काल: सुबह 10:48 बजे से दोपहर 12:23 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:45 बजे से 01:40 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 03:29 बजे से 03:34 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 08:03 बजे से 08:23 बजे तक
हरियाली तीज की प्रामाणिक पूजा विधि
हरियाली तीज के दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। पूजन के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की मिट्टी या धातु की मूर्तियां स्थापित की जाती हैं।
- भगवान शिव और माता पार्वती को पंचामृत और शुद्ध गंगाजल से स्नान कराएं।
- महादेव को बेलपत्र, भांग, धतूरा, सफेद पुष्प, भस्म और चंदन अर्पित करें।
- मां पार्वती को लाल चुनरी ओढ़ाकर सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
- घी का दीपक जलाकर हरियाली तीज की पौराणिक व्रत कथा का पाठ करें या सुनें।
- आरती के पश्चात फल, मिठाई और विशेष भोग सामग्री का अर्पण करें।
- पूजा के समापन पर अनजाने में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें और सुखी गृहस्थ जीवन का आशीर्वाद लें।
पौराणिक व्रत कथा का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पर्वतराज हिमालय की पुत्री मां पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए 107 जन्मों तक कठोर तपस्या की। 108वें जन्म में सावन पक्ष की तृतीया तिथि को ही शिव जी ने प्रकट होकर मां पार्वती को मनोवांछित वर दिया। इसी कारण सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए इस व्रत का पालन करती हैं।



