राजनांदगांव, 2 नवंबर 2026:
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के खैरा गांव ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। खैरा गांव के सभी 141 घरों की छतों पर सोलर पैनल स्थापित कर इसे देश का पहला 100 प्रतिशत सोलर गांव घोषित किया गया है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से इस छोटे से गांव ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता की एक नई और अनूठी मिसाल पेश की है।
मुफ्त में मिली बिजली की आजादी, 282 KW की कुल क्षमता
889 की आबादी वाले इस गांव के प्रत्येक घर में 2 किलोवाट (kW) क्षमता का रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाया गया है। इस प्रकार पूरे गांव में कुल 282 किलोवाट सौर ऊर्जा उत्पादन की क्षमता विकसित हो चुकी है। इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि ग्रामीणों को सोलर सिस्टम लगवाने के लिए अपनी जेब से एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ा। केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाली सब्सिडी के बाद बची हुई शेष राशि की व्यवस्था कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) फंड के माध्यम से की गई।
गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचा लाभ
इस सौर क्रांति का लाभ समाज के हर वर्ग तक समान रूप से पहुंचाया गया है। खैरा गांव के कुल 141 परिवारों में से:
- 93 परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के हितग्राही हैं।
- 21 परिवार अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग से हैं।
- 4 परिवार अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से हैं।
‘पीएम सूर्य सखियों’ और महिला शक्ति ने संभाली कमान
गांव को पूरी तरह सोलर-युक्त बनाने में महिलाओं की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुई। ‘पीएम सूर्य सखियों’ ने घर-घर जाकर ग्रामीणों को योजना के फायदों से अवगत कराया और आवेदन प्रक्रिया पूरी करने में मदद की। स्थानीय महिला कार्यकर्ता संगीता साहू और पद्मश्री फुलबासन बाई यादव के महिला समूह नेटवर्क ने ग्रामीणों को इस मुहिम से जोड़ने में अग्रणी भूमिका निभाई। इसके साथ ही बैंक शिविरों और ग्राम बैठकों के जरिए वित्तीय व तकनीकी प्रक्रियाओं को आसान बनाया गया।
बिजली बिल से राहत और कमाई का मौका (नेट मीटरिंग)
इस पहल से ग्रामीणों को भारी-भरकम बिजली बिलों से हमेशा के लिए राहत मिलेगी। गांव में नेट मीटरिंग व्यवस्था लागू की गई है, जिसके तहत घरों में जरूरत से ज्यादा पैदा होने वाली बिजली को सीधे सरकारी ग्रिड में भेज दिया जाएगा। इससे उपभोक्ताओं को बिजली बिल में अतिरिक्त वित्तीय लाभ (छूट या कमाई) मिलेगा। साथ ही, पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम होने से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
देश के अन्य गांवों के लिए बना प्रेरणास्रोत
गांव के सरपंच भूपेंद्र यादव और समस्त ग्रामीणों की सामूहिक सहभागिता ने यह साबित कर दिया है कि जनभागीदारी से ग्रामीण भारत में कितना बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। सरकारी योजनाओं, महिला समूहों के नेटवर्क और CSR सहयोग के बेहतरीन तालमेल से खैरा गांव अब पूरे देश के लिए स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता का एक आदर्श मॉडल बन चुका है।



