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टंडवा पंचायत (दुर्गा पंडाल के पास )में बोर खनन के नाम पर ₹1,00,000/- का भुगतान; बिल में महंगी लोहे की पाइप और वेल्डिंग, धरातल पर प्लास्टिक पाइप मिलने से गहराया रहस्य!


तिल्दा/रायपुर: ग्राम पंचायत टंडवा (तिल्दा) में 15वें वित्त आयोग की राशि से कराए गए बोर खनन कार्य के भुगतानों को लेकर एक बड़ा तकनीकी विरोधाभास सामने आया है। e-GramSwaraj पोर्टल से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर सजग नागरिकों और पंचों ने जिला प्रशासन व जनपद सीईओ (CEO) से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है।

बिल लगाने वाले की जानकारी पर उठे गंभीर सवाल:
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, पंचायत द्वारा “कृषि संजीवनी केन्द्र एवं बोरवेल्स” नाम की फर्म को ₹1,00,000/- का ऑनलाइन भुगतान किया गया है। वेंडर द्वारा प्रस्तुत बिल (क्र. 206) में बाकायदा 110 फीट लोहे (MS/GI) की महंगी केसिंग पाइप और उसे आपस में जोड़ने के लिए 6 नग वेल्डिंग व सॉकेट का भारी-भरकम खर्च दर्शाया गया है। परंतु, जब धरातल पर मौके का मुआयना किया गया, तो वहां लोहे के बजाय प्लास्टिक (uPVC) की केसिंग पाइप लगी हुई पाई गई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सामान्य तौर पर जब भी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) या अन्य किसी सरकारी योजना के गाइडलाइन के तहत बोर खनन होता है, तो वहां अक्सर प्लास्टिक पाइप का ही उपयोग देखने को मिलता है। ऐसे में यह गंभीर संदेह पैदा होता है कि यदि यह बोरवेल पंचायत ने स्वयं की देखरेख में खोदा था, तो बिल लगाने वाले को खुद यह जानकारी क्यों नहीं थी कि जमीन के भीतर लोहे का नहीं बल्कि प्लास्टिक का पाइप डाला गया है? तकनीकी रूप से प्लास्टिक की पाइप में लोहे की वेल्डिंग होना पूरी तरह से नामुमकिन है।

किसी अन्य शासकीय बोर पर दोबारा भुगतान का गहरा संदेह:
मौके पर महंगे लोहे के बिल के विपरीत प्लास्टिक पाइप का मिलना इस ओर इशारा करता है कि यह बोरवेल संभवतः किसी अन्य सरकारी योजना या पीएचई विभाग के अंतर्गत पहले ही तैयार किया जा चुका था। उसी संरचना को आधार बनाकर, केवल कागजों पर महंगे लोहे की प्रविष्टि दर्शाकर शासकीय राशि का आहरण करने के उद्देश्य से यह कूटरचित बिल तैयार किया गया प्रतीत होता है। इस संदेह को बल तब और मिलता है जब बिल में दर्ज एक्सिस बैंक खाता संख्या के ऊपर जानबूझकर काली स्याही से ओवरराइटिंग की गई है, जिससे मूल खाताधारक की जानकारी छिप सके।

उच्च स्तरीय जांच की मांग:

सजग नागरिकों ने मांग की है कि संबंधित तिल्दा संभाग के पीएचई (PHE) कार्यालय से क्षेत्र में हुए बोर खनन के रिकॉर्ड मंगाए जाएं और तकनीकी अभियंताओं (इंजीनियरों) की टीम भेजकर इस स्थल का तत्काल भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कराया जाए। जांच में विसंगति सही पाए जाने पर दोषी सरपंच, सचिव और संबंधित फर्म के विरुद्ध शासकीय नियमों के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

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