रायपुर, 25 अक्टूबर 2024: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में भव्य ‘सरगुजा प्रखंड’ का लोकार्पण किया है। लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस विशेष प्रखंड में छत्तीसगढ़ के सरगुजा अंचल की आदिवासी जीवनशैली, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक व पुरातात्विक धरोहरों को सजीव रूप में प्रदर्शित किया गया है।
इस गरिमामयी समारोह के दौरान छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, केन्द्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू सहित राज्य शासन के कई वरिष्ठ मंत्री, सांसद, विधायक और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
एक ही छत के नीचे दिखेगी सरगुजा की अनूठी आदिवासी संस्कृति
सरगुजा प्रखंड को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक छत्तीसगढ़ के विभिन्न आदिवासी समुदायों के रहन-सहन और उनकी प्राचीन संस्कृति से सीधे रूबरू हो सकें। इस प्रखंड में निम्नलिखित प्रमुख आकर्षणों को शामिल किया गया है:
- पण्डो और पहाड़ी कोरवा जनजाति के पारंपरिक आवास: प्रखंड में बांस और छिंद के पत्तों से बने पण्डो जनजाति के पारंपरिक घरों को दर्शाया गया है, जहां देवताओं की पूजा का विशेष स्थान होता है। वहीं, पहाड़ी कोरवा जनजाति के लकड़ी से बने घरों पर देवी-देवताओं की सुंदर नक्काशी की गई है।
- सामत सरना शिव मंदिर (डीपाडीह) की प्रतिकृति: यहाँ 7वीं से 13वीं शताब्दी के प्राचीन मंदिरों के भग्नावशेषों की सुंदर प्रतिकृति तैयार की गई है, जो पुरातात्विक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।
- बैकुंठपुर महल कोरिया: भारतीय वास्तुकला के बेजोड़ उदाहरण और 1946 में पूर्ण हुए इस ऐतिहासिक महल की हूबहू प्रतिकृति भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र है।
- रामगढ़ की पहाड़ी और सीताबेंगरा गुफा: महाकवि कालिदास की अमर रचना ‘मेघदूतम्’ की साक्षी रही रामगढ़ की पहाड़ी और भरत मुनि की प्राचीन नाट्यशाला के रूप में प्रसिद्ध ‘सीताबेंगरा गुफा’ के अवशेषों को भी यहाँ खूबसूरती से उतारा गया है।
- मड़िया खंबा: मड़िया जनजाति की पहचान और उनके सामुदायिक व धार्मिक आयोजनों के प्रतीक ‘मड़िया खंबा’ को भी इस परिसर में स्थान मिला है।
यह अनूठा प्रखंड न केवल राज्य की पर्यटन क्षमता को बढ़ावा देगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए आदिवासियों के पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक पुरावैभव को सुरक्षित रखने में एक मील का पत्थर साबित होगा।




