आरंग (मोहन दास मानिकपुरी)। खड़ी धान की फसल के बीच PV App के माध्यम से कराई जा रही फसल गिरदावरी की व्यवस्था को लेकर अब किसानों के हितों पर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस मुद्दे पर जिला पंचायत सदस्य वतन चन्द्राकर ने सरकार की नीति और व्यवस्था को लेकर गहरी नाराजगी जताते हुए किसानों के हित में ठोस निर्णय लेने की माँग की है।
पटवारियों की हड़ताल से बढ़ी चिंता
राज्य में 12 अक्टूबर 2026 से पटवारियों द्वारा शुरू की गई अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच फसल गिरदावरी की प्रक्रिया और उसके संभावित परिणामों को लेकर चिंताएँ बेहद बढ़ गई हैं। वतन चन्द्राकर के मुताबिक, जब खेतों में धान की फसल खड़ी है, तब PV App के माध्यम से प्रत्येक किसान के खेत का वास्तविक सर्वेक्षण करना व्यावहारिक तौर पर संभव नहीं लग रहा है।
जमीनी स्तर पर व्यावहारिक कठिनाइयाँ
चन्द्राकर ने सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण तकनीकी और भौगोलिक समस्याएँ उठाई हैं:
- अधूरा नक्शा बटांकन: राज्य के अनेक गाँवों में नक्शा बटांकन का काम अभी भी अधूरा है, जिससे खेतों की वास्तविक पहचान स्पष्ट नहीं हो पा रही है।
- धान विक्रय पर संकट: फसल गिरदावरी का सीधा संबंध किसानों के धान विक्रय और उनकी आर्थिक स्थिति से है। यदि तकनीकी या भौगोलिक कारणों से किसी किसान का सर्वेक्षण अधूरा रह जाता है, तो उसे धान बेचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
“किसान का समय अमूल्य है, उसे तकनीकी प्रयोग की प्रयोगशाला या परीक्षण न बनाया जाए। तकनीक का इस्तेमाल किसानों की सुविधा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए होना चाहिए, न कि उनके सामने नई समस्याएं खड़ी करने के लिए।”
— वतन चन्द्राकर, जिला पंचायत सदस्य
सरकार से पूछे तीखे सवाल
वतन चन्द्राकर ने सरकार से नीति स्पष्ट करने की माँग करते हुए सवाल किया है कि:
- व्यावहारिक कठिनाइयों का समाधान किए बिना नई तकनीकी व्यवस्था पर इतना जोर क्यों दिया जा रहा है?
- क्या सरकार यह सुनिश्चित कर सकती है कि इस तकनीकी प्रक्रिया के कारण किसी भी पात्र किसान का धान विक्रय प्रभावित नहीं होगा?
- यदि ऐप या सर्वेक्षण में कोई त्रुटि (Error) होती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा और पीड़ित किसान को राहत कैसे मिलेगी?
त्वरित समाधान की माँग
उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि वह PV App से गिरदावरी की प्रक्रिया की जमीनी व्यवहार्यता की तुरंत समीक्षा करे और अधूरे नक्शा बटांकन की समस्या का निराकरण करे। किसानों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए सरकार को तत्काल पहल करनी चाहिए और पटवारियों से संवाद स्थापित कर हड़ताल व विवाद को समाप्त कराना चाहिए ताकि धान खरीदी के सीजन में अन्नदाताओं को कोई अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।



