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सेंदरी मानसिक अस्पताल में मरीज की आत्महत्या: भर्ती के एक दिन बाद बाथरूम में गमछे से लगाई फांसी

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में स्थित राज्य के एकमात्र शासकीय सेंदरी मानसिक चिकित्सालय में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां भर्ती एक मरीज ने अस्पताल के बाथरूम में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान महासमुंद जिले के रहने वाले लखन लाल साव (35) के रूप में हुई है, जिन्हें एक दिन पहले ही इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

बाथरूम में गमछे से लगाई फांसी

जानकारी के अनुसार, लखन लाल साव पिता स्व. ईश्वर साव, ग्राम बरना (जिला महासमुंद) के निवासी थे। वह मानसिक बीमारी के इलाज के लिए परिजनों के साथ बिलासपुर के सेंदरी मानसिक चिकित्सालय पहुंचे थे और उन्हें एक दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

बताया जा रहा है कि गुरुवार सुबह वह अस्पताल के बाथरूम में गए, जहां उन्होंने रोशनदान में गमछा बांधकर फांसी लगा ली। जब तक अस्पताल स्टाफ को इसकी जानकारी मिलती, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। घटना के बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया।

पुलिस ने शुरू की जांच

घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रबंधन ने कोनी थाना पुलिस को जानकारी दी। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई के बाद पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रबंधन ने कोनी थाना पुलिस को जानकारी दी। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई के बाद पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

कोनी थाना प्रभारी भावेश शेंडे के अनुसार, प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि मृतक पहले भी 2 से 3 बार आत्महत्या का प्रयास कर चुका था। मरीज के साथ उसकी पत्नी मौजूद थी। सुबह दोनों के बीच मोबाइल को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद वह बाथरूम गया और फांसी लगा ली।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। मानसिक रोगियों के इलाज के लिए बने अस्पतालों में आमतौर पर विशेष निगरानी और सुरक्षा की व्यवस्था होती है, ताकि मरीज खुद को नुकसान न पहुंचा सकें।

छत्तीसगढ़ मैदानी स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के महामंत्री मुन्ना लाल निर्मलकर ने कहा कि प्रदेश के एकमात्र शासकीय मानसिक चिकित्सालय में हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, इसके बावजूद मरीजों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। उन्होंने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की है।

पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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