हेल्थ

जीरो फैट के चक्कर में कहीं आप भी तो नहीं कर रहे सेहत के साथ खिलवाड़ ये सच जानकर रह जाएंगे हैरान…

हेल्थ : आजकल फिट दिखने की होड़ में जीरो-फैट का कॉन्सेप्ट तेजी से पॉपुलर हो रहा है। वजन घटाने की जंग में लोगों ने घी और तेल को अपनी डाइट से पूरी तरह बाहर कर दिया है। लेकिन आयुर्वेद और विज्ञान दोनों चेतावनी देते हैं कि फैट-फ्री लाइफस्टाइल सेहत नहीं बल्कि बीमारियों का घर है।

आज की सुस्त जीवनशैली में खुद को फिट रखने के लिए लोग अक्सर शॉर्टकट अपनाते हैं। इसी का नतीजा है दुनियाभर में फैला जीरो-फैट का भ्रम। लोग अनजाने में तेल और घी को अपना दुश्मन मान बैठे हैं जबकि हकीकत यह है कि स्वस्थ वसा के बिना मानव शरीर का सुचारू रूप से चलना असंभव है।

जीरो फैट का कॉन्सेप्ट

बाजार में मिलने वाले लो-फैट और जीरो-फैट प्रोडक्ट्स को स्वास्थ्य के नाम पर बेचा जा रहा है लेकिन इनका अधिक सेवन मस्तिष्क और कोशिकाओं पर बुरा असर डालता है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर को सुचारू रूप से चलाने के लिए चिकनाई का एक सीमित स्तर होना अनिवार्य है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि हम बैड फैट (पिज्जा, समोसे, प्रोसेस्ड फूड) की नहीं बल्कि गुड फैट की बात कर रहे हैं।

क्यों जरूरी है डाइट में गुड फैट

हमारे शरीर में विटामिन ए, डी, ई और के वसा में घुलनशील होते हैं। यदि आप वसा का सेवन बंद कर देंगे, तो आपका शरीर इन जरूरी विटामिन्स को सोख नहीं पाएगा जिससे कुपोषण का खतरा बढ़ जाता है।

हमारा दिमाग काफी हद तक वसा से बना है। ओमेगा-3 फैटी एसिड जैसे गुड फैट न्यूरॉन्स के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान में मदद करते हैं। इसकी कमी से डिप्रेशन, अल्जाइमर और याददाश्त कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

शरीर के दो सबसे महत्वपूर्ण हॉर्मोन टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन को बनने के लिए वसा की जरूरत होती है। महिलाओं में गुड फैट की कमी सीधे तौर पर मासिक धर्म और प्रजनन संबंधी समस्याओं को जन्म देती है।

डाइट में ये चीजें करें शामिल

खुद को स्वस्थ रखने के लिए देशी घी, कच्ची घानी का तेल (सरसों, नारियल या तिल), अखरोट, बादाम, अलसी के बीज, एवोकाडो और जैतून के तेल को सीमित मात्रा में लें। यह वसा आपकी कोशिकाओं को नया जीवन देती है और शरीर को अंदरूनी रूप से मजबूत बनाती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button