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ईरान ने ‘BAPCO’ पर दागा बैलिस्टिक मिसाइल, दुनिया की सबसे पहली रिफाइनरी से निकलने लगी आग की लपटें, अगर ये बंद हुआ तो बूंद-बूंद तेल के लिए मोहताज हो जाएगी दुनिया

बहरीन:  ईखाड़ी देशों में युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। इसी कड़ी में ईरान ने आज दुनिया के सबसे बड़े पेट्रोलियम कंपनी (BAPCO) की ‘मामीर’ स्थित तेल रिफाइनरी पर बैलिस्टिक मिसाइल दागे गए हैं। इस हमले के बाद से बहरीन में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं, इस हमले के बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर BAPCO में रिफाइनरी बंद हुआ तो पूरी दुनिया में तेल सप्लाई बाधित हो सकती है। हमले का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें धुएं का गुबार उठता दिखाई दे रहा है।

बापको पर हुआ हमला

वहीं, बहरीन के आंतरिक मंत्रालय ने एक बयान में पुष्टि की कि एक औद्योगिक क्षेत्र में स्थित उनके एक प्रतिष्ठान (तेल रिफाइनरी) पर हमला हुआ है। मंत्रालय ने अपने एक अन्य बयान में कहा हे कि मामीर स्थित एक प्रतिष्ठान भी हमले के बाद आग की चपेट में आ गया था, जिस पर काबू पा लिया गया है। इस घटना में किसी के भी हताहत होने की खबर नहीं है।

दुनिया की सबसे पहली रिफाइनरी

बता दें कि यह रिफाइनरी बहरीन पेट्रोलियम कंपनी (बापको) द्वारा संचालित है, जो राज्य की राष्ट्रीय तेल कंपनी है और खाड़ी देशों की सबसे पुरानी रिफाइनरी में से एक है। 1929 में स्थापित ‘बापको’ खाड़ी के अरब पक्ष में तेल की खोज करने वाली पहली कंपनियों में से थी और इसने बहरीन के ऊर्जा क्षेत्र और अर्थव्यवस्था में केंद्रीय भूमिका निभाई है। फिलहाल इस रिफाइनरी से प्रतिदिन 3,80,000-4,00,000 बैरल तेल का प्रसंस्करण होता है।

क्या है बापको?

यह बहरीन की राष्ट्रीय तेल कंपनी है, जिसे अब Bapco Refining (Bapco Energies के तहत) के नाम से जाना जाता है। इसकी स्थापना 1929 में हुई थी और 1932 में इसने खाड़ी क्षेत्र में पहली बार तेल की खोज की थी।

बापको प्रतिदिन कितना तेल रिफाइन करती है?

बापको की रिफाइनिंग क्षमता हाल के वर्षों में आधुनिकीकरण कार्यक्रम (BMP – Bapco Modernization Programme) के कारण काफी बढ़ गई है। आधुनिकीकरण के बाद इसकी क्षमता अब 3,80,000 से 4,05,000 बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गई है।

बापको बंद हुआ तो दुनिया पर क्या असर होगा?

बापको अपने उत्पादन का 85% से 95% हिस्सा निर्यात करता है। यह मुख्य रूप से भारत, सुदूर पूर्व (Far East), दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका को तेल उत्पादों की आपूर्ति करता है। इसके बंद होने से इन क्षेत्रों में डीजल और जेट फ्यूल की किल्लत हो सकती है। यह रिफाइनरी उच्च गुणवत्ता वाला ‘अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल’ (ULSD) और जेट फ्यूल बनाने के लिए जानी जाती है। इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन ईंधनों की कीमतें बढ़ सकती हैं। यह खाड़ी क्षेत्र की सबसे पुरानी और रणनीतिक रिफाइनरियों में से एक है। इसकी बंदी से मध्य पूर्व के रिफाइंड उत्पाद बाजार में अस्थिरता आ सकती है।

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