
नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र अबूझमाड़ में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। नारायणपुर जिले के घने जंगलों में माओवादियों द्वारा छिपाकर रखा गया एक बड़ा डंप सुरक्षा बलों ने बरामद किया है। इस कार्रवाई में एक करोड़ रुपये से अधिक नकद राशि, अत्याधुनिक हथियार, भारी मात्रा में गोला-बारूद, विस्फोटक सामग्री और संचार उपकरण जब्त किए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियां इसे माओवादियों के लॉजिस्टिक और हथियार नेटवर्क पर बड़ी चोट मान रही हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई ‘माड़ बचाओ अभियान’ के तहत की गई। अभियान में नारायणपुर पुलिस, डीआरजी, एसटीएफ, आईटीबीपी और बीएसएफ की संयुक्त टीमों ने हिस्सा लिया। बताया गया कि करीब एक महीने तक लगातार चलाए गए सघन सर्च ऑपरेशन और खुफिया सूचना के आधार पर अबूझमाड़ के अंदरूनी जंगलों में माओवादियों के कई संदिग्ध ठिकानों की पहचान की गई थी। इसके बाद संयुक्त टीमों ने जंगलों में छिपाकर रखे गए डंप तक पहुंचकर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया।
इस पूरे अभियान की सबसे बड़ी बरामदगी ₹1 करोड़ 1 लाख 64 हजार नकद राशि की रही। अधिकारियों का मानना है कि इस रकम का उपयोग माओवादी संगठन हथियार खरीदने, कैडरों की सप्लाई, नई भर्ती और विस्फोटक निर्माण जैसी गतिविधियों में करने वाला था। पुलिस का कहना है कि इतनी बड़ी नकद राशि की बरामदगी यह संकेत देती है कि माओवादी संगठन अब भी अपने नेटवर्क को मजबूत बनाए रखने की कोशिश में जुटा हुआ था।
रोबिनसन गुड़िया ने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान जिले में अब तक कुल 270 हथियार बरामद किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से माओवादी संगठन की आर्थिक और सैन्य क्षमता कमजोर हो रही है। एसपी के मुताबिक ग्रामीणों के सहयोग और मजबूत आसूचना तंत्र की वजह से इस ऑपरेशन को सफलता मिली।
बरामद हथियारों में तीन एके-47 रायफल, तीन एसएलआर, दो .303 रायफल, एक .315 रायफल, दो 12 बोर बंदूक और दो देशी कट्टे शामिल हैं। इसके अलावा 300 से अधिक जिंदा कारतूस, 132 बीजीएल सेल, इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटर, कार्डेक्स वायर, वायरलेस सेट और अन्य संचार उपकरण भी जब्त किए गए हैं। सुरक्षा बलों ने पांच किलो सोरा, तीन किलो सफेद पाउडर, रेडियो सेल और दैनिक उपयोग की कई अन्य सामग्रियां भी बरामद की हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह डंप माओवादियों के लिए हथियार आपूर्ति, विस्फोटक निर्माण और रणनीतिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र था। अबूझमाड़ क्षेत्र लंबे समय से माओवादी गतिविधियों का गढ़ माना जाता रहा है, जहां घने जंगल और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बनी रहती हैं। इसके बावजूद लगातार चल रहे अभियानों से सुरक्षा बलों को सफलता मिल रही है।



