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भिलाई निगम चुनाव: 70 वार्डों में टिकट की जंग तेज; संगठन की प्रक्रिया चलेगी या दिग्गजों का प्रभाव?

भिलाई। भिलाई नगर निगम के 70 वार्डों में चुनावी बिगुल फूंकने से पहले ही राजनीतिक दलों के भीतर टिकट को लेकर खींचतान शुरू हो चुकी है। शहर में पार्षद से लेकर महापौर की कुर्सी तक पहुंचने की चाह रखने वाले संभावित उम्मीदवार अपनी-अपनी बिसात बिछाने में लगे हैं। भिलाई में इस बार महापौर पद अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित किया गया है, जिसके बाद से दोनों ही दलों में ओबीसी चेहरों की दावेदारी और सक्रियता कई गुना बढ़ गई है।

भाजपा में बूथ स्तर पर तैयारी, संगठन को सर्वोपरि रखने का दावा

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में जिला और संभाग स्तर की मैराथन बैठकों का दौर जारी है। पार्टी ने बूथ और वार्ड स्तर पर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। शीर्ष नेतृत्व का पूरा जोर 70 वार्डों के संगठनात्मक दायित्वों और नई मतदाता सूची के सूक्ष्म अध्ययन पर है।

टिकट वितरण के तरीकों पर बात करते हुए भाजपा भिलाई के जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन ने स्पष्ट किया कि, “पार्टी में संगठन ही सर्वोपरि है। कार्यकर्ताओं को इस बात को लेकर किसी भी प्रकार का संदेह नहीं होना चाहिए।” इसके बावजूद दावेदारों के बीच बेचैनी है कि स्थानीय गुटीय समीकरण टिकट मिलने में कितनी भूमिका निभाएंगे।

कांग्रेस में 5 अक्टूबर की बैठक पर नजरें; जमीनी पकड़ और नेताओं से संपर्क का गणित

दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस में भी टिकट की रेस में शामिल नेता वार्डों में अपनी पकड़ दिखाने, संगठन में सक्रिय रहने और बड़े नेताओं की परिक्रमा करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इसी बीच दुर्ग में कांग्रेस के पुतला दहन मामले को लेकर राजनीति गरमाई हुई है, जहां कोर्ट में 9 कांग्रेसियों के पहुंचने के मामले ने भी सियासी पारा चढ़ाया है।

पार्टी की चुनावी रणनीति और टिकट प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस भिलाई के जिला अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर ने बताया कि, “निगम चुनाव के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किए जा चुके हैं। आगामी 5 अक्टूबर को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक के बाद संगठन की तय गाइडलाइन के तहत ही वार्डवार प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।”

सर्वे और फीडबैक की चर्चाओं ने बढ़ाई धड़कनें

सूत्रों के मुताबिक, भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल इस बार फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। अंदरूनी तौर पर संभावित नामों को लेकर गोपनीय सर्वे और वार्ड स्तर से फीडबैक मंगाए जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं। हाल ही में हुए वार्ड आरक्षण के बाद कई वर्तमान पार्षदों के चुनावी गणित पूरी तरह बदल गए हैं, जिसके कारण अब नए चेहरों की एंट्री और पुराने दिग्गजों की रणनीतियों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। टिकटों की आधिकारिक घोषणा से पहले आने वाले दिनों में वार्ड स्तर पर राजनीतिक मुलाकातें, जनसंपर्क और लॉबिंग और तेज होने की उम्मीद है।

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