दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग सत्र न्यायालय ने सड़क हादसे के एक मामले में वाहन चलाने वाले बेटे के साथ-साथ उसे बिना ड्राइविंग लाइसेंस के मोटरसाइकिल देने वाले पिता को भी दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। अदालत ने लापरवाही से गाड़ी चलाकर जान लेने वाले आरोपी बेटे मोहित कुमार बघेल (19) को 5 साल के सश्रम कारावास की सजा दी है। वहीं, बिना लाइसेंस के बेटे को वाहन सौंपने वाले पिता मोहन लाल बघेल (54) को 3 महीने के साधारण कारावास और 5,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
यह ऐतिहासिक फैसला सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार की अदालत द्वारा सुनाया गया है।
क्या है पूरा मामला?
यह दुर्घटना 4 अगस्त 2025 की रात करीब 8:30 बजे की है। स्मृतिनगर चौकी क्षेत्र के कोहका स्थित इंदु आईटी स्कूल के पास आरोपी मोहित कुमार बघेल बेहद तेज रफ्तार और लापरवाही से मोटरसाइकिल चला रहा था। बाइक पर उसका दोस्त वासुदेव ठाकुर भी पीछे बैठा था। इसी दौरान मोहित की तेज रफ्तार बाइक अनियंत्रित होकर विपरीत दिशा (रॉन्ग साइड) में चली गई और सामने से आ रही एक एक्टिवा स्कूटर से बेहद जोरदार तरीके से टकरा गई।
एक की मौत, एक गंभीर रूप से घायल
इस भीषण टक्कर में स्कूटर सवार शादान अली (23), पिता शकील हुसैन को बेहद गंभीर चोटें आईं। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वहीं, उनके साथ स्कूटर पर मौजूद उत्तम कुमार पांडेय भी इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए।
जांच में पिता की लापरवाही आई सामने
पुलिस और अभियोजन पक्ष (सरकारी वकील द्रोण तम्रकार) की जांच में यह बात साबित हुई कि दुर्घटना के वक्त आरोपी मोहित के पास कोई वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। इसके बावजूद उसके पिता मोहन लाल ने जानते-बूझते हुए अपने बेटे को गाड़ी चलाने के लिए दी थी। अदालत ने माना कि बिना लाइसेंस वाले बच्चे को वाहन सौंपना और सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी करना भी एक गंभीर अपराध है।
अदालत का यह फैसला उन सभी अभिभावकों के लिए एक बड़ा सबक है, जो बिना लाइसेंस या नाबालिग बच्चों के हाथों में लापरवाही से गाड़ियां सौंप देते हैं।




