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छत्तीसगढ़ में राम वनगमन पथ पर सियासत तेज: साय सरकार तीन चरणों में विकसित करेगी 31 नए धार्मिक स्थल

रायपुर, 12 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीराम के वनगमन पथ को विकसित करने की योजना को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने गहन शोध और ऐतिहासिक संदर्भों के आधार पर राम वनगमन पथ के विकास के लिए 31 नए स्थलों का चयन किया है। राज्य सरकार की इस योजना के तहत वर्ष 2026 से 2029 तक तीन चरणों में विकास कार्य प्रस्तावित किए गए हैं। इस नई सूची और स्थलों के चयन को लेकर दोनों राजनीतिक दलों में विवाद छिड़ गया है।

योजना के मुताबिक, चयनित स्थलों पर श्रद्धालुओं और साधु-संतों की सुविधा के लिए आश्रय स्थल, सत्संग भवन और सीता रसोई जैसी आधुनिक बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य राज्य में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ भगवान श्रीराम से जुड़ी प्राचीन मान्यताओं और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पटल पर लाना है।

तीन वित्तीय वर्षों में पूरा होगा विकास कार्य
पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के अनुसार, राम वनगमन पथ से जुड़े इन स्थलों का कायाकल्प तीन चरणों (10, 10 और 11 के क्रम में) में पूरा किया जाएगा:

  • पहला चरण: वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान विकास कार्य।
  • दूस端 चरण: वित्तीय वर्ष 2027-28 में सुविधाओं का विस्तार।
  • तीसरा चरण: वित्तीय वर्ष 2028-29 में अंतिम चरण का कार्य।

जहां भाजपा इस पूरी कवायद को पूरी तरह शोध आधारित और निर्विवाद बता रही है, वहीं कांग्रेस ने पूर्ववर्ती सरकार के समय चुने गए स्थलों में किए गए बदलावों और सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, सरकार का कहना है कि पिछली सरकार के अधूरे कामों को भी पर्याप्त बजट के साथ पूरा किया जाएगा।


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