नई दिल्ली: भागदौड़ भरी जिंदगी में अचानक मांसपेशियों में खिंचाव (Muscle Strain), कमर दर्द या पैर में मोच आ जाना बेहद आम बात है। लेकिन ऐसी स्थिति में अक्सर लोग इस उलझन में पड़ जाते हैं कि दर्द से राहत पाने के लिए ठंडी सिकाई (Ice/Cold Compress) करें या गर्म (Heat Compress)। स्वास्थ्य विशेषज्ञों (Health Experts) के अनुसार, सिकाई का सही विकल्प चुनना चोट की गंभीरता, सूजन और वह कितनी पुरानी है, इस बात पर निर्भर करता है। गलत सिकाई आपकी तकलीफ को कम करने के बजाय बढ़ा भी सकती है। आइए जानते हैं दोनों प्रकार की सिकाई के लिए क्या हैं डॉक्टरी नियम:
1. ठंडी सिकाई (Cold Therapy): नई चोट और सूजन के लिए रामबाण
अचानक लगी चोट या अचानक आए खिंचाव के शुरुआती 24 से 48 घंटों के भीतर ठंडी सिकाई को सबसे बेहतर माना जाता है।
- कब करें: पैर में मोच आने पर, अचानक मांसपेशियों में खिंचाव होने पर, या जहां तुरंत सूजन और तेज दर्द हो।
- कैसे काम करती है: बर्फ की ठंडक रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) को सिकोड़ देती है। इससे प्रभावित हिस्से में ब्लड फ्लो कम होता है, जिससे आंतरिक ब्लीडिंग और सूजन पर तुरंत रोक लगती है तथा दर्द सुन्न हो जाता है।
- तरीका: बर्फ को हमेशा किसी पतले तौलिये या सूती कपड़े में लपेटकर ही त्वचा पर 15-20 मिनट के लिए लगाएं। सीधे त्वचा पर बर्फ रगड़ने से ‘आइस बर्न’ का खतरा रहता है।
2. गर्म सिकाई (Heat Therapy): पुराने दर्द और जकड़न का इलाज
मांसपेशियों के पुराने दर्द और शरीर की अकड़न को दूर करने के लिए गर्म सिकाई को बेहद उपयोगी माना जाता है।
- कब करें: पुरानी कमर दर्द (Chronic Back Pain), गर्दन या कंधों की जकड़न, और वर्कआउट के बाद होने वाले मांसपेशियों के दर्द में।
- कैसे काम करती है: गर्मी रक्त वाहिकाओं को फैलाती है, जिससे प्रभावित हिस्से में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों से भरपूर ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है। यह खिंची हुई और थकी हुई मांसपेशियों को आराम (Relax) देकर उनकी फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाती है।
- तरीका: हीटिंग पैड या गर्म पानी की बोतल से दिन में 2-3 बार 15 से 20 मिनट के लिए सिकाई करें।
भूलकर भी न करें ये गलतियां (सावधानियां)
- नई चोट पर गर्मी नहीं: किसी भी ताजी चोट या नई सूजन पर कम से कम 2 से 3 दिनों तक भूलकर भी गर्म सिकाई न करें, इससे सूजन और जलन अधिक बढ़ सकती है।
- खुले घाव पर सिकाई मना है: यदि चोट के कारण त्वचा छिल गई है या खुला घाव है, तो वहां कोई भी सिकाई न करें।
- छाती पर सिकाई: छाती के हिस्से पर बिना डॉक्टरी सलाह के ठंडी सिकाई करने से बचें।
डॉक्टर की सलाह कब लें?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सिकाई के बाद भी दर्द 48 घंटों में कम न हो, प्रभावित हिस्से पर वजन उठाना नामुमकिन हो जाए, या दर्द के साथ बुखार महसूस हो, तो इसे गंभीर अंदरूनी डैमेज या इन्फेक्शन का संकेत मानकर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।



