गरियाबंद। गरियाबंद जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की गंगा बहाने वाले जनप्रतिनिधि अब अपनी पंचायतों के हक की राशि के लिए कटोरा लेकर सड़क पर उतरने को मजबूर हो गए हैं। पंचायतों की बदहाल आर्थिक स्थिति और खाली खजाने से नाराज जिला सरपंच संघ ने शासन-प्रशासन के खिलाफ बड़े आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।
2 नवंबर को कलेक्ट्रेट का घेराव और प्रदर्शन
जिला सरपंच संघ गरियाबंद के नेतृत्व में समस्त उपसरपंचों और पंचों ने 2 नवंबर 2026 (सोमवार) को एक अनोखे और उग्र प्रदर्शन का ऐलान किया है। मिली जानकारी के अनुसार, इस आंदोलन की शुरुआत सुबह 11 बजे कुमार भवन, सिविल लाइन गरियाबंद से होगी। इसके बाद सभी जनप्रतिनिधि हाथों में कटोरा लेकर एक विशाल रैली निकालेंगे, जो बस स्टैंड से होते हुए जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचेगी। कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन कर प्रशासन को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा जाएगा।
त्योहार के माहौल में पसरा सन्नाटा
यह तस्वीर बेहद अजीब और चिंताजनक है कि जहां पूरा देश दीपावली पर घरों में दीये जलाने और खुशियां मनाने की तैयारी कर रहा है, वहीं गरियाबंद जिले के सरपंच अपनी पंचायतों के खाली खजाने का हिसाब लेकर शासन-प्रशासन के दरवाजे पर दस्तक देने जा रहे हैं। सरपंचों का कहना है कि बजट न होने के कारण गांवों में विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
चक्काजाम और उग्र आंदोलन की चेतावनी
आंदोलन को लेकर जारी किए गए पोस्टर में जनप्रतिनिधियों ने आर-पार की लड़ाई का मूड साफ कर दिया है। पोस्टर में न सिर्फ कटोरा लेकर प्रदर्शन करने की बात कही गई है, बल्कि मांगें पूरी न होने पर कलेक्ट्रेट के घेराव और चक्काजाम करने की भी सख्त चेतावनी दी गई है। अब देखना यह होगा कि इस अनोखे प्रदर्शन के बाद प्रशासन जागता है या गांवों के विकास का यह गतिरोध यूं ही बना रहता है।



