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छत्तीसगढ़ में चक्रवात की आशंका से किसान चिंतित, पककर तैयार धान की फसल पर संकट

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मौसम के बदले मिजाज और चक्रवाती तूफान की आहट ने प्रदेश के अन्नदाताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं। राज्य में इस समय खरीफ सीजन के तहत करीब 36 से 40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल लगी हुई है। अधिकांश इलाकों में फसल पककर पूरी तरह तैयार है, लेकिन ऐन वक्त पर लगातार हो रही बारिश ने भारी नुकसान का खतरा पैदा कर दिया है।

खेतों में जलभराव से डूबेगी मेहनत, काले पड़ सकते हैं धान के दाने
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, खेतों में पानी भरने से पक चुकी धान की खड़ी फसल के गिरने (लॉजिंग) का खतरा सबसे ज्यादा होता है। इसके अलावा, लंबे समय तक पानी जमा रहने से धान के दाने काले पड़ सकते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता और चमक खराब हो जाएगी। जिन किसानों को इस बार प्रति एकड़ 21 से 30 क्विंटल तक रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद थी, वे अब अपनी सालभर की मेहनत पर पानी फिरने की आशंका से बेहद चिंतित हैं। इसका सीधा असर किसानों की उपज और उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।

कृषि विशेषज्ञों ने जारी की जरूरी एडवायजरी
बिगड़ते मौसम को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने किसानों को तुरंत कुछ बेहद जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है:

  • कटाई टालें: जो फसलें पक चुकी हैं, उनकी कटाई को अगले 2 से 4 दिनों के लिए टाल दें।
  • जल निकासी: खेतों में जमा अतिरिक्त पानी को निकालने के लिए तुरंत सुरक्षित रास्ता बनाएं।
  • सुरक्षित भंडारण: यदि फसल कट चुकी है, तो कटी हुई फसल और चारे को किसी ऊंचे स्थान पर ले जाएं और उसे तिरपाल से अच्छी तरह ढककर रखें।
  • सब्जियों का निपटारा: तैयार सब्जियों की तुड़ाई कर उन्हें तुरंत नजदीकी बाजार पहुंचाएं।
  • पशुधन की सुरक्षा: अपने मवेशियों और पालतू पशुओं को जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर किसी सुरक्षित व सूखे स्थान पर बांधें।

बीमा कंपनी को तुरंत दें सूचना
विशेषज्ञों ने किसानों को सचेत किया है कि यदि बारिश या खेतों में जलभराव के कारण फसल को किसी भी तरह का नुकसान पहुंचता है, तो बिना देर किए तुरंत अपनी फसल बीमा कंपनी और स्थानीय कृषि विभाग को इसकी लिखित या डिजिटल सूचना दें, ताकि समय पर सर्वे कर राहत राशि (मुआवजा) की प्रक्रिया शुरू की जा सके।

फिलहाल, प्रदेश भर के किसानों की नजरें आसमान और मौसम विभाग के अपडेट पर टिकी हैं। आने वाले 48 से 72 घंटे छत्तीसगढ़ की धान की फसल और किसानों की तकदीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

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