नई दिल्ली, 27 अक्टूबर:
अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन का महापर्व करवा चौथ इस साल गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को पूरे देश में पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं और अपने पति की लंबी आयु, समृद्धि व सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।
पूजा थाली और सामग्री का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ की पूजा में सही पूजन सामग्री और सुसज्जित थाली का होना अनिवार्य माना गया है। व्रत रखने वाली महिलाओं को पूजा शुरू करने से पहले सभी जरूरी वस्तुएं एकत्रित कर लेनी चाहिए।
पूजा की थाली में मुख्य रूप से निम्नलिखित सामग्रियां शामिल होनी चाहिए:
- जल से भरा करवा (मिट्टी या तांबे का पात्र)
- छलनी (जिससे चंद्र दर्शन किया जाता है)
- रोली और अक्षत (तिलक के लिए)
- दीपक (घी या तेल का)
- मिठाई और भोग
शहरों के अनुसार बदलेगा चांद निकलने का समय
करवा चौथ के व्रत का समापन रात को चंद्रमा को अर्घ्य देने और चंद्र दर्शन करने के बाद ही होता है। इस दिन महिलाएं छलनी से पहले चांद को और फिर अपने पति का चेहरा देखकर उनका आशीर्वाद लेती हैं, जिसके बाद पानी पीकर व्रत खोला जाता है।
मौसम और भौगोलिक स्थिति के कारण हर शहर में चंद्रोदय (चांद निकलने) का समय अलग-अलग होता है। ऐसे में व्रती महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने शहर में व्रत खोलने से पहले स्थानीय पंचांग या विश्वसनीय समय सारणी के अनुसार चंद्रोदय का सही समय जरूर देख लें।



