धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के वनांचल क्षेत्र में पिछले 30 घंटों से दहशत का पर्याय बना आदमखोर तेंदुआ आखिरकार ग्रामीणों के कब्जे में आ गया है। इस दौरान तेंदुए ने बहीगांव, कारीपानी, बस्तर-बूड़रा और अमानारा सहित आसपास के इलाकों में भारी तबाही मचाई। महज 30 घंटे के भीतर तेंदुए ने 23 लोगों पर जानलेवा हमला किया, जिसमें एक गर्भवती महिला सहित दो लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। वहीं कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
घरों में घुसकर किए हमले, इलाके में पसरा सन्नाटा
तेंदुए के खौफ से पूरे वनांचल में ऐसा डर का माहौल था कि लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया था। तेंदुआ बस्तियों और घरों में घुसकर लोगों को अपना शिकार बना रहा था। इन हमलों में बस्तर-बूड़रा की रहने वाली गर्भवती महिला रामशिला मंडावी और अमानारा के अधेड़ प्रभुलाल गोड़ की मौत हो गई। इस घटना के बाद से गांवों में मातम और चिंता का माहौल है।
बेटी की जान बचाने के लिए काल बन गए पिता
तेंदुए के आतंक के बीच शुक्रवार सुबह करीब 7:30 बजे आमानारा गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। तेंदुआ अचानक सुरेश मरकाम के घर में घुस गया और उनकी 3 वर्षीय मासूम बेटी सुहानी मरकाम पर जानलेवा हमला कर दिया। बेटी को मौत के मुंह में जाता देख पिता सुरेश मरकाम ने अपनी जान की परवाह नहीं की और निहत्थे ही आदमखोर तेंदुए से भिड़ गए। सुरेश ने तेंदुए को पूरी ताकत से दबोच लिया। शोर सुनकर पहुंचे अन्य ग्रामीणों की मदद से तेंदुए को चारों तरफ से जकड़कर रस्सी से बांध दिया गया।
जंगल सफारी भेजने की तैयारी
तेंदुए के पकड़े जाने की सूचना मिलते ही उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन सहित वन विभाग के आला अधिकारी दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। वन विभाग ने तेंदुए को अपने नियंत्रण में लेकर उसका प्राथमिक उपचार किया। अधिकारियों के मुताबिक, तेंदुए को अब जंगल सफारी भेजने की तैयारी की जा रही है, जहां उसे विशेषज्ञ डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में रखा जाएगा।
अस्पतालों में घायलों का इलाज जारी
तेंदुए के इस भीषण हमले में घायल हुए 21 लोगों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
- 08 घायल: नगरी सिविल अस्पताल में भर्ती हैं।
- 08 घायल: जिला अस्पताल धमतरी में उपचाराधीन हैं।
- अन्य घायल: विश्रामपुरी और केशकाल के अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं।
ग्रामीणों की सूझबूझ और बहादुरी से तेंदुए को तो काबू कर लिया गया है, लेकिन इलाके में अब भी वन विभाग के सामने प्रभावित गांवों में सतर्कता बनाए रखने और ग्रामीणों की पुख्ता सुरक्षा सुनिश्चित करने की बड़ी चुनौती है।



