नई दिल्ली: इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026, रविवार से हो रही है। हिंदू धर्म में नवरात्रि के त्योहार का विशेष महत्व है, जिसमें मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना की जाती है। इसी आस्था के तहत नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष विधान है। मान्यता है कि छोटी कन्याएं माता रानी का साक्षात बाल स्वरूप होती हैं। इस दौरान लोग कन्याओं को आदरपूर्वक घर बुलाकर सात्विक भोजन कराते हैं और उन्हें दक्षिणा या उपहार देकर विदा करते हैं।
हालांकि, ज्योतिष शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन में सही उपहार चुनना बेहद महत्वपूर्ण है। गलत वस्तुओं का दान करने से आपकी पूजा का फल प्रभावित हो सकता है। आइए जानते हैं ज्योतिषविदों के अनुसार कन्या पूजन में क्या देना शुभ होता है और किन चीजों से बचना चाहिए:
क्या देना माना जाता है बेहद शुभ?
- उपयोगी वस्तुएं व दक्षिणा: कन्याओं को केवल पैसे देने के बजाय उनकी जरूरत की चीजें जैसे पाठ्य सामग्री (किताबें, पेन) या शिक्षा से जुड़ी वस्तुएं देना उत्तम माना जाता है।
- श्रृंगार और वस्त्र: लाल, पीले या हरे रंग के सुंदर वस्त्र अथवा माता की चुनरी और श्रृंगार सामग्री भेंट करना शुभता का प्रतीक है।
- फल और मिठाई: सात्विक भोजन के बाद कन्याओं को मौसमी फल (जैसे केला या सेब) और नारियल देना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है।
भूलकर भी न दें ये चीजें (बरतें ये सावधानियां)
- काले रंग के कपड़े: कन्या पूजन में बच्चियों को कभी भी काले या गहरे डार्क रंग के कपड़े उपहार में नहीं देने चाहिए।
- धारदार या नुकीली वस्तुएं: उपहार में भूलकर भी कैंची, चाकू या कोई भी नुकीली वस्तु शामिल न करें, इसे ज्योतिष में अशुभ माना जाता है।
- प्लास्टिक या लोहे के बर्तन: यदि आप बर्तन दे रहे हैं, तो स्टील, पीतल या तांबे के बर्तन चुनें। प्लास्टिक या लोहे की वस्तुएं देने से बचें।
निष्कर्ष:
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, कन्या पूजन का पूर्ण फल तभी मिलता है जब पूरे आदर-सत्कार और सही विधि से कन्याओं को विदा किया जाए। इस बार 11 अक्टूबर से शुरू हो रहे महापर्व में उपहारों का चयन करते समय इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप माता रानी की असीम कृपा प्राप्त कर सकते हैं।




