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रायपुर में 2 अगस्त को डिजिटल न्याय व्यवस्था पर राज्य स्तरीय कार्यशाला, CM साय होंगे मुख्य अतिथि…

रायपुर। छत्तीसगढ़ में नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और न्याय व्यवस्था को डिजिटल तकनीकों से सशक्त बनाने की दिशा में 2 अगस्त को रायपुर में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इस कार्यशाला का उद्देश्य न्यायपालिका, पुलिस और अभियोजन तंत्र के बीच डिजिटल समन्वय को मजबूत करना तथा न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और जनोन्मुखी बनाना है।

रायपुर के होटल बेबीलॉन इंटरनेशनल, वीआईपी रोड में आयोजित होने वाली इस कार्यशाला का विषय “नवीन आपराधिक कानूनों के माध्यम से डिजिटल न्याय व्यवस्था को सशक्त बनाना” रखा गया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय होंगे मुख्य अतिथि

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा करेंगे।

विशिष्ट अतिथियों में शामिल होंगे—

  • उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा
  • विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेन्द्र यादव
  • न्यायमूर्ति चंद्रवंशी
  • छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीश
न्यायपालिका और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी होंगे शामिल

कार्यशाला में राज्य की न्यायिक सेवा के अधिकारी, सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक (SP), पुलिस महानिरीक्षक (IG), पुलिस महानिदेशक (DGP) सहित पुलिस, अभियोजन और न्यायिक तंत्र के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे।

इस आयोजन का उद्देश्य विभिन्न संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और न्याय व्यवस्था में डिजिटल तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देना है।

इन महत्वपूर्ण विषयों पर होगा मंथन

कार्यशाला में कई महत्वपूर्ण डिजिटल और तकनीकी विषयों पर चर्चा होगी, जिनमें शामिल हैं—

  • अंतर-संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली (ICJS)
  • अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं प्रणाली (CCTNS)
  • डिजिटल न्यायिक समन्वय
  • नवीन आपराधिक कानूनों में तकनीकी एकीकरण
  • न्याय एवं पुलिस व्यवस्था का डिजिटलीकरण

इन विषयों पर राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के वरिष्ठ अधिकारी तकनीकी प्रशिक्षण और विस्तृत प्रस्तुतीकरण देंगे।

डिजिटल न्याय व्यवस्था को मिलेगी नई दिशा

राज्य सरकार के अनुसार यह कार्यशाला न्यायपालिका, पुलिस और अभियोजन तंत्र के बीच समन्वित डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करेगी। साथ ही नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में तेजी आएगी और नागरिकों को अधिक त्वरित, पारदर्शी, सुलभ और प्रभावी न्याय उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

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