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छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण पर घमासान: सुकमा और धमतरी में उपजा विवाद, नए ‘धर्म स्वातंत्र्य कानून-2026’ पर टिकी नजरें

रायपुर। छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। प्रदेश के सुकमा और धमतरी जिलों से सामने आए दो अलग-अलग मामलों ने इस बहस को और तेज कर दिया है। इन विवादों के बीच राज्य सरकार द्वारा लाया गया नया ‘धर्म स्वातंत्र्य कानून-2026’ भी सुर्खियों में आ गया है, जिसे लेकर प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

सुकमा: ग्राम सभा ने पादरियों के प्रवेश और चर्च निर्माण पर लगाई रोक

धर्मांतरण को लेकर पहला बड़ा मामला सुकमा जिले के पुनपल्ली गांव से सामने आया है। यहां स्थानीय ग्राम सभा ने एक कड़ा रुख अपनाते हुए एक विशेष प्रस्ताव पारित किया है। इस प्रस्ताव के तहत ईसाई और धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों के शवों को दफनाने, गांव में चर्च के निर्माण और किसी भी प्रकार की प्रार्थना सभा के आयोजन के लिए ग्राम सभा की जमीन देने से साफ इनकार कर दिया गया है। इतना ही नहीं, पंचायत के सूचना पटल (Notice Board) पर बाकायदा पादरियों और अन्य धर्म प्रचारकों के गांव में प्रवेश पर रोक लगाने का आदेश भी जारी किया गया है।

धमतरी: अंतिम संस्कार पर विवाद के बाद ‘घर वापसी’

दूसरा मामला धमतरी जिले के भटगांव का है, जहां एक धर्मांतरित महिला के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार को लेकर गहरा सामाजिक विवाद खड़ा हो गया। मामले को सुलझाने के लिए बुलाई गई समाज की बैठक के बाद पीड़ित परिवार ने हिंदू धर्म और सामाजिक रीति-रिवाजों को मानने पर अपनी सहमति दी। परिवार के सदस्यों का कहना है कि उन्होंने करीब चार साल पहले अपनी मर्जी से ईसाई धर्म अपनाया था, और अब वे पूरी तरह अपनी इच्छा से दोबारा हिंदू धर्म (घर वापसी) में लौट आए हैं। जिसके बाद हिंदू रीति-रिवाज से महिला का अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।

चर्चा में ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य कानून-2026’

इन दोनों जमीनी विवादों के बीच छत्तीसगढ़ सरकार का नया धर्म स्वातंत्र्य कानून-2026 भी चर्चा के केंद्र में है। इस कानून को लेकर राज्य सरकार का रुख बेहद स्पष्ट है। सरकार का कहना है कि इस सख्त कानून का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में होने वाले किसी भी प्रकार के अवैध, जबरन या प्रलोभन देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण पर पूरी तरह रोक लगाना है।

ग्रामीण इलाकों में बढ़ते टकराव को देखते हुए प्रशासन अब इन दोनों मामलों पर नजर बनाए हुए है, वहीं नए कानून के लागू होने के बाद आने वाले दिनों में धर्मांतरण से जुड़े नियमों और कार्रवाईयों में और सख्ती देखने को मिल सकती है।


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