
ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन की रिफ़िलिंग अवधि के बावजूद गैस संकट गहराया: परमानंद जांगड़े
आरंग। आरंग विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आरंग, मंदिर हसौद, चंदखुरी, नया रायपुर, समोदा, भानसोज, भैषा एवं खरोरा सहित विभिन्न क्षेत्रों में स्थित गैस वितरण केंद्रों पर आम जनता गंभीर संकट का सामना कर रही है। उपभोक्ताओं को रसोई गैस सिलेंडर के लिए घंटों लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है, फिर भी समय पर गैस उपलब्ध नहीं हो पा रही है। स्थिति को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या एजेंसियों द्वारा जानबूझकर कृत्रिम कमी (shortage) और पैनिक की स्थिति पैदा की जा रही है, या फिर शासन स्तर से पर्याप्त आपूर्ति ही सुनिश्चित नहीं की जा रही है। इस गंभीर विषय पर तत्काल संज्ञान लेकर कार्रवाई की मांग की गई है।
आम आदमी पार्टी के नेता एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य परमानंद जांगड़े ने कहा कि शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिनों की रिफ़िलिंग अवधि निर्धारित होने के बावजूद भी उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है, जबकि जिम्मेदार विभाग एवं प्रशासनिक तंत्र निष्क्रिय बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि जनता रोज़मर्रा की जरूरतों के लिए संघर्ष कर रही है—गांवों में लोग पुनः लकड़ी और पारंपरिक ईंधन पर निर्भर होने को मजबूर हैं, महिलाएं धुएं में खाना पकाने को विवश हैं, जबकि प्रशासनिक स्तर पर स्थिति को सामान्य बताने का प्रयास किया जा रहा है।
जांगड़े ने तीखे शब्दों में कहा—
“45 दिन से गैस गायब है, लेकिन सरकार और प्रशासन दोनों ही लापता हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी केवल औपचारिकता निभा रहे हैं। यह व्यवस्था नहीं, बल्कि जवाबदेही से भागती हुई प्रशासनिक विफलता का स्पष्ट उदाहरण है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि 45 दिनों तक आवश्यक घरेलू ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की जा सकती, तो अच्छे दिन और “सुशासन” के दावे किस आधार पर किए जा रहे हैं ?
जांगड़े ने कहा “जनता सिलेंडर के लिए लाइन में खड़ी है और सरकार प्रचार में व्यस्त है—यही आज की जमीनी हकीकत है।”
उन्होंने तत्काल गैस आपूर्ति बहाल करने, वितरण व्यवस्था की स्वतंत्र जांच कराने तथा जिम्मेदार एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।



