
रायपुर। राज्य में पेट्रोल और डीजल की किल्लत की आशंका के बीच स्वास्थ्य विभाग ने आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को लेकर विशेष सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। हेल्थ कमिश्नर संजीव झा ने सभी जिलों के कलेक्टरों को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं कि स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत संचालित आपातकालीन वाहनों को पेट्रोल पंपों पर प्राथमिकता के आधार पर ईंधन उपलब्ध कराया जाए, ताकि चिकित्सा सेवाएं बिना किसी बाधा के जारी रह सकें।
जारी पत्र में हेल्थ कमिश्नर ने कहा है कि स्वास्थ्य विभाग के तहत संचालित 108 संजीवनी एक्सप्रेस, 102 महतारी एक्सप्रेस, 1099 मुक्तांजलि वाहन तथा पीएम जनमन मोबाइल मेडिकल यूनिट (एमएमयू) सेवाएं आपातकालीन चिकित्सा प्रतिक्रिया प्रणाली का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन सेवाओं को अतिआवश्यक श्रेणी में रखा गया है, क्योंकि ये आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को त्वरित चिकित्सा सहायता और अस्पताल तक निर्बाध परिवहन उपलब्ध कराती हैं।
कमिश्नर संजीव झा ने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि सभी जिलों में संचालित पेट्रोल पंपों और ईंधन रीफ्यूलिंग केंद्रों को निर्देशित किया जाए कि उक्त वाहनों को प्राथमिकता के आधार पर पेट्रोल और डीजल उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि यदि इन सेवाओं को समय पर ईंधन नहीं मिला तो स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है और गंभीर मरीजों तक समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचाने में परेशानी हो सकती है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि ईंधन उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की देरी सीधे तौर पर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करेगी। ऐसे में जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियों का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। हेल्थ कमिश्नर ने सभी कलेक्टरों से अपेक्षा की है कि वे अपने-अपने जिलों में तेल विपणन कंपनियों और पेट्रोल पंप संचालकों को तत्काल आवश्यक निर्देश जारी करें, ताकि स्वास्थ्य विभाग के वाहनों को किसी भी स्थिति में ईंधन संकट का सामना न करना पड़े।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि 108 और 102 जैसी सेवाएं ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मरीजों के लिए जीवन रेखा का काम करती हैं। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, दुर्घटना पीड़ितों और गंभीर मरीजों के लिए ये एम्बुलेंस सेवाएं बेहद महत्वपूर्ण हैं। वहीं मुक्तांजलि वाहन अंतिम संस्कार से जुड़ी सेवाओं में उपयोग किए जाते हैं, जबकि मोबाइल मेडिकल यूनिट दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का कार्य करती हैं।
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया है, ताकि किसी भी संभावित ईंधन संकट के बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।



