छत्तीसगढ़सरगुजा

संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया पर विवाद, युवा कांग्रेस-NSUI ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

अंबिकापुर। संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। विश्वविद्यालय द्वारा असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर पदों के लिए निकाली गई भर्ती पर युवा कांग्रेस और एनएसयूआई ने गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन के पदाधिकारियों ने कुलपति को ज्ञापन सौंपकर भर्ती प्रक्रिया में रोस्टर नियमों के उल्लंघन, पारदर्शिता की कमी और बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाया है। साथ ही भर्ती प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।

जानकारी के अनुसार, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा, अंबिकापुर द्वारा 22 दिसंबर 2025 को असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। विज्ञापन जारी होने के बाद से ही भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों के बीच सवाल उठने लगे थे। मंगलवार को युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के पदाधिकारी विश्वविद्यालय पहुंचे और कुलपति को ज्ञापन सौंपते हुए भर्ती प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया।

ज्ञापन में कहा गया है कि भर्ती प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ राज्य के रोस्टर नियमों का पालन नहीं किया गया है। संगठन का आरोप है कि भर्ती में महिलाओं और दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित पदों का उल्लेख नहीं किया गया, जिससे स्पष्ट होता है कि रोस्टर प्रणाली का सही तरीके से पालन नहीं हुआ। छात्र संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि रोस्टर निर्धारण के लिए आवश्यक समिति का गठन तक नहीं किया गया।

युवा कांग्रेस और एनएसयूआई ने भर्ती प्रक्रिया की वैधता पर भी सवाल खड़े किए हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि विश्वविद्यालय में कार्यपरिषद के अनुमोदन के बिना भर्ती विज्ञापन जारी नहीं किया जा सकता, जबकि विज्ञापन जारी होने के समय कार्यपरिषद का गठन ही नहीं हुआ था। ऐसे में भर्ती विज्ञापन जारी किए जाने को नियम विरुद्ध बताया गया है।

संगठनों ने दावा किया कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों से दावा-आपत्ति मंगाई गई थी, लेकिन उसके बाद संशोधित सूची सार्वजनिक नहीं की गई। आरोप है कि यदि सूची जारी की गई थी तो उसे विश्वविद्यालय की वेबसाइट या सूचना पटल पर प्रकाशित क्यों नहीं किया गया। इससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि वर्ष 2013 और 2018 में जारी पुराने विज्ञापनों के विषयों के नाम बदलकर दोबारा भर्ती निकाली गई है। छात्र संगठनों का आरोप है कि जिन विषयों का संचालन विश्वविद्यालय में वर्तमान में नहीं हो रहा है, उन विषयों के लिए भी भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसे भी गंभीर अनियमितता बताया गया है।

युवा कांग्रेस और एनएसयूआई ने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और पैसों के लेनदेन की आशंका है। ज्ञापन में दावा किया गया कि इस प्रक्रिया में प्रभावशाली लोगों और सत्ता से जुड़े व्यक्तियों की भूमिका होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। संगठनों ने कहा कि यह मामला सरगुजा संभाग के युवाओं और योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है, इसलिए पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुरूप होनी चाहिए।

छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से भर्ती प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और नए सिरे से पारदर्शी तरीके से विज्ञापन जारी करने की मांग की है। साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य के रोस्टर नियमों का पालन करते हुए विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाने की बात कही गई है।

युवा कांग्रेस और एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन शुरू करेंगे। साथ ही राजभवन पहुंचकर राज्यपाल से मुलाकात कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी करेंगे।

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