दुर्ग। दुर्ग नगर निगम की सामान्य सभा में उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब महापौर अल्का बाघमार के जवाबों से खुद उनकी ही पार्टी के पार्षद और एल्डरमेन असंतुष्ट नजर आए। बैठक के दौरान टेंडर प्रक्रिया और शहर की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर सदन में करीब दो घंटे तक तीखी बहस चली।
5.22 करोड़ रुपये के टेंडर पर बवाल
हंगामे की मुख्य वजह साइंस कॉलेज के पास से कैनाल रोड होते हुए दुर्ग रेलवे स्टेशन तक सड़क निर्माण के लिए प्रस्तावित 5.22 करोड़ रुपये का टेंडर रहा। भाजपा पार्षदों ने आरोप लगाया कि यह टेंडर पहले ही चार बार निरस्त हो चुका है, लेकिन बार-बार यह टेंडर घूम-फिरकर एक ही पिता-पुत्र की फर्म को मिल रहा है। पार्षदों ने इस प्रक्रिया में मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कड़ी आपत्ति जताई, जबकि कुछ पार्षदों ने इसे बहुमत से पारित करने का सुझाव दिया।
महापौर ने दी सफाई
विपक्ष और अपनी ही पार्टी के पार्षदों के आरोपों पर पक्ष रखते हुए महापौर अल्का बाघमार ने कहा कि 10 लाख रुपये से अधिक के सभी टेंडर ऑनलाइन माध्यम से होते हैं। इसमें कोई भी ठेकेदार भाग ले सकता है। उन्होंने पार्षदों को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें पहले इस ऑनलाइन प्रक्रिया को ठीक से समझना चाहिए।
“वार्डों में गमछा डालकर निकलना पड़ता है”
सदन में केवल टेंडर ही नहीं, बल्कि शहर के ठप पड़े विकास कार्यों का मुद्दा भी जोर-शोर से गूंजा। पार्षदों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वार्डों में बुनियादी काम रुके हुए हैं, जिससे उन्हें जनता के तीखे सवालों और गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति पर तंज कसते हुए कुछ पार्षदों ने यहां तक कह दिया कि वार्ड में बदहाली के कारण अब उन्हें मुंह पर गमछा डालकर निकलना पड़ता है।
वहीं, पद्मनाभपुर वार्ड के भाजपा पार्षद संजय अग्रवाल ने भी मोर्चा खोलते हुए महापौर द्वारा हर दो महीने में सामान्य सभा बुलाने के पुराने आश्वासन पर सवाल उठाए और पूछा कि इस वादे पर अब तक अमल क्यों नहीं किया गया। इस हंगामेदार बैठक ने साफ कर दिया है कि शहर की समस्याओं के साथ-साथ निगम के भीतर भी आपसी मतभेद गहरे होते जा रहे हैं।



