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ईसाई और धर्मांतरित व्यक्तियों को नहीं मिलेगी गांव की जमीन, धार्मिक गतिविधियों पर भी रोक

सुकमा: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के कोंटा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले पुनपल्ली गांव की विशेष ग्राम सभा ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करते हुए स्पष्ट किया है कि गांव की सीमा के भीतर ईसाई एवं धर्मांतरित व्यक्तियों को शव दफनाने, चर्च निर्माण, प्रार्थना सभा या अन्य किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधियों के लिए ग्राम सभा की भूमि उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।

पेसा (PESA) कानून का दिया हवाला

ग्राम सभा ने अपने इस फैसले और प्रस्ताव के समर्थन में संविधान की पांचवीं अनुसूची, केंद्रीय पेसा अधिनियम 1996 (PESA Act) और छत्तीसगढ़ पेसा कानून 2022 के तहत मिले अधिकारों का हवाला दिया है। ग्रामीणों और पारंपरिक प्रतिनिधियों का कहना है कि यह निर्णय गांव की पारंपरिक व्यवस्था, सामाजिक एकता, सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक हितों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

प्रस्ताव क्रमांक 6 सर्वसम्मति से पास

बैठक के दौरान निर्णय क्रमांक 6 के तहत धार्मिक गतिविधियों और ग्राम सभा की भूमि के आबंटन से जुड़े इस प्रस्ताव को ग्रामीणों की मौजूदगी में सर्वसम्मति से पास किया गया। इस प्रस्ताव के लागू होने के बाद अब ईसाई या धर्मांतरण कर चुके व्यक्तियों को गांव में किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि के लिए जमीन का एक टुकड़ा भी नहीं दिया जाएगा।

सूचना पटल पर जारी की गई चेतावनी

ग्राम सभा के इस ऐतिहासिक फैसले को सार्वजनिक करने और सभी को सूचित करने के लिए गांव में एक सूचना व चेतावनी पटल (बोर्ड) भी लगाया गया है। इस सूचना पटल पर स्पष्ट तौर पर उल्लेख किया गया है कि बिना ग्राम सभा की पूर्व अनुमति के गांव में किसी भी प्रकार का धार्मिक प्रचार, धर्मांतरण और चंगाई या प्रार्थना सभाएं आयोजित करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रशासन के माध्यम से वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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