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सनातन संस्कृति का अपमान, छत्तीसगढ़ अस्मिता से खिलवाड़ और 1984 सिख नरसंहार पर कांग्रेस घेरी: राहुल गांधी के ‘शिव तांडव’ वाले बयान पर तीखा हमला

रायपुर: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्ष के आंदोलन को ‘भगवान शिव की बारात और तांडव’ से जोड़ने पर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक तीखा राजनीतिक बयान सामने आया है। जारी प्रेस नोट/बयान में कांग्रेस की मानसिकता, सनातन संस्कृति के अपमान, छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के बहिष्कार और ऐतिहासिक घटनाओं को लेकर चौतरफा हमला बोला गया है।

1. राहुल गांधी के ‘शिव तांडव’ वाले बयान पर खड़े किए सवाल

बयान में कहा गया है कि रामलीला मैदान में राहुल गांधी द्वारा भगवान शिव की बारात और तांडव का उल्लेख करना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। भगवान भोलेनाथ की बारात समरसता, सद्भाव और सामाजिक एकात्मता का प्रतीक है, जिसमें समाज के प्रत्येक वर्ग का स्थान है। शिवजी की बारात में हर कोई सहर्ष शामिल हो सकता है, लेकिन तांडव को राजनीतिक अराजकता से जोड़ने की मानसिकता का बिल्कुल भी समर्थन नहीं किया जा सकता।

बयान में नसीहत देते हुए कहा गया कि भगवान शिव का तांडव सनातन धर्म का गहन आध्यात्मिक दर्शन है, कोई राजनीतिक नारा नहीं। राहुल गांधी को पहले ‘शिवतत्त्व’ को समझना चाहिए और सनातन संस्कृति को बार-बार आहत करने के लिए देश से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

2. छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस के बहिष्कार पर ‘महतारी’ का अपमान

कांग्रेस द्वारा 1 नवंबर को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस जैसे गौरवशाली और ऐतिहासिक अवसर का बहिष्कार करने पर कड़ा रोष जताया गया है। बयान के अनुसार, स्थापना दिवस के कार्यक्रमों से दूरी बनाकर कांग्रेस नेताओं ने ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ और प्रदेश के तीन करोड़ नागरिकों की भावनाओं का घोर अपमान किया है। इस कृत्य के लिए कांग्रेस को प्रदेशवासियों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

3. 1 नवंबर 1984 का सिख नरसंहार: दोहरा रवैया उजागर

कांग्रेस को इतिहास के काले पन्नों की याद दिलाते हुए बयान में कहा गया कि 1 नवंबर 1984 को हुआ सिख नरसंहार देश के इतिहास का एक अत्यंत दर्दनाक अध्याय है। कांग्रेस को उस जघन्य घटना की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और उसमें अपने नेताओं की भूमिका पर देश को जवाब देना चाहिए। एक ओर कांग्रेस इतिहास की चुनिंदा घटनाओं पर राजनीति करती है, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के स्थापना दिवस का बहिष्कार करती है, जो उसके दोहरे चरित्र और वास्तविक मानसिकता को पूरी तरह उजागर करता है।

4. रामलीला मैदान में भीड़ के दावों की खुली पोल

रामलीला मैदान की रैली में 10 लाख लोगों की भीड़ जुटने के कांग्रेस के दावों को पूरी तरह भ्रामक और हास्यास्पद करार दिया गया है। बयान में स्पष्ट किया गया कि रामलीला मैदान की कुल क्षमता ही लगभग 45 हजार लोगों की है, जिसका एक बड़ा हिस्सा मंच निर्माण, वीआईपी सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं में उपयोग हो जाता है। ऐसे में 10 लाख की भीड़ का दावा जनता को गुमराह करने वाला है और कांग्रेस को अपने इस झूठे दावे की वास्तविकता स्पष्ट करनी चाहिए।

5. अराजकता बनाम राष्ट्रहित की राजनीति

कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास पर निशाना साधते हुए कहा गया कि सत्ता में रहते हुए आपातकाल (Emergency) लगाना और सत्ता से बाहर रहने पर देश में राजनीतिक अस्थिरता व भ्रम का माहौल बनाना कांग्रेस का पुराना ढर्रा रहा है। आज भी राहुल गांधी और कांग्रेस देश के ज्वलंत मुद्दों पर सकारात्मक भूमिका निभाने के बजाय केवल राजनीतिक टकराव और अराजकता को बढ़ावा दे रहे हैं।

निष्कर्ष:
बयान के अंत में दृढ़ता से कहा गया कि देश को इस समय अराजकता नहीं बल्कि एकता की आवश्यकता है। देश राजनीतिक स्वार्थ से नहीं, राष्ट्रहित से चलता है। सनातन संस्कृति, सिख समाज के सम्मान और छत्तीसगढ़ की अस्मिता के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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