Homeछत्तीसगढअर्नब तूफान का कहर: खेतों में बिछी धान की तैयार फसल, आरंग...

अर्नब तूफान का कहर: खेतों में बिछी धान की तैयार फसल, आरंग क्षेत्र में 90% तक नुकसान की आशंका; किसानों ने की मुआवजे की मांग

आरंग/खरोरा। अर्नब साइक्लोन (तूफान) के प्रभाव से पिछले कुछ दिनों से जारी मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं ने आरंग विधानसभा क्षेत्र के किसानों की कमर तोड़ दी है। कटाई के लिए पूरी तरह तैयार और खेतों में लहलहाती धान की फसल तेज हवाओं के कारण जमीन पर बिछ गई है। कई इलाकों में फसलें पानी में डूबकर गलने लगी हैं, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत और लागत पर पानी फिरता नजर आ रहा है।

खरोरा क्षेत्र के किस्मतपूरा और रहरपाड़ी जैसे इलाकों में तो हालात बेहद गंभीर हैं, जहां फसलें 75 से 90 प्रतिशत तक नष्ट हो चुकी हैं। किसानों का कहना है कि प्रति एकड़ 25 से 30 हजार रुपये की लागत लगाकर जो फसल तैयार की गई थी, जिससे 40 हजार रुपये तक की आमदनी की उम्मीद थी, वह अब पानी में डूबकर बर्बाद हो रही है। धूप न निकलने और जलजमाव के कारण धान पर काई जमने लगी है।

कटाई का खर्च हुआ दोगुना, फसल बचाने की जंग में जुटे किसान
मौसम की इस मार के बीच ग्राम मखनोजा सहित कई गांवों के किसान खुद खेतों में उतरकर पानी निकासी की व्यवस्था करने में जुटे हैं। किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बिखरी हुई फसल को सड़ने से बचाने की है। खेतों में पानी और कीचड़ भरने के कारण अब ट्रैक्टर या हार्वेस्टर से कटाई करना नामुमकिन हो गया है। मजदूरों से कटाई कराने पर खर्च दोगुना आ रहा है, जिससे किसानों पर महंगाई की दोहरी मार पड़ रही है। इसके अलावा, धान के दाने काले पड़ने और उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने से बाजार में सही दाम न मिलने का डर भी सता रहा है।

सर्वे और फसल बीमा के तहत राहत की मांग
तबाही को देखते हुए आरंग क्षेत्र के प्रभावित किसानों ने शासन-प्रशासन से तत्काल कदम उठाने की गुहार लगाई है। किसानों ने मांग की है कि:

  • राजस्व विभाग की टीम भेजकर फसलों के वास्तविक नुकसान का जल्द से जल्द सर्वे कराया जाए।
  • प्रभावित किसान परिवारों को आर्थिक संकट से उबारने के लिए ‘राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC) 6-4’ के तहत उचित राहत व मुआवजा राशि दी जाए।
  • जिन किसानों ने फसल बीमा कराया है, उन्हें बीमा कंपनी के माध्यम से क्लेम दिलाने की प्रक्रिया को प्रशासनिक स्तर पर तुरंत शुरू किया जाए।

फिलहाल, किसानों की नजरें आसमान पर टिकी हैं कि कब मौसम साफ हो और वे अपनी बची-खुची फसल को समेट सकें, वहीं दूसरी ओर वे उचित मुआवजे के लिए प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।


RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments