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प्यार, धोखा और खौफनाक अंत; मेरठ के ‘नीला ड्रम कांड’ में पत्नी और प्रेमी को फांसी की सजा

मेरठ। कॉलेज के दिनों में शुरू हुई एक प्रेम कहानी का अंत इस कदर खौफनाक होगा, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड, जिसे देश भर में ‘नीला ड्रम कांड’ के नाम से जाना गया, में अदालत ने न्याय का बड़ा सिद्धांत स्थापित किया है। मर्चेंट नेवी के पूर्व अधिकारी सौरभ राजपूत की बेरहमी से हत्या करने के मामले में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई है।

अभियोजन पक्ष की ओर से इस मामले को क्रूरता की सारी हदें पार करने वाला बताते हुए फांसी की मांग की गई थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। करीब 13 महीने चले ट्रायल और 126 सुनवाइयों के बाद पीड़ित परिवार को आखिरकार इंसाफ मिला है। फैसले के बाद मृतक सौरभ की मां रेणु और पूरे परिवार ने न्यायपालिका का आभार व्यक्त करते हुए इसे न्याय की बड़ी जीत बताया है।

🔪 मर्डर की खौफनाक साजिश और रिहर्सल

जांच में सामने आया कि मुस्कान ने अपने पति सौरभ के मर्डर के लिए बाकायदा ‘रिहर्सल’ की थी। वारदात से 8 दिन पहले उसने 800 रुपये में दो चाकू खरीदे और वार करने का अभ्यास किया। बाद में उसने गला रेतने वाला उस्तरा भी खरीदा। 3 मार्च 2025 को जब सौरभ लंदन से लौटकर मेरठ अपने घर आया, तो मुस्कान ने पहले उसे नींद की गोलियां दे दीं। सौरभ के अचेत होने के बाद मुस्कान ने उस पर चाकू से वार किए और उस्तरे से उसका गला काट दिया, जिसके बाद उसके प्रेमी साहिल ने शव के 15 टुकड़े कर दिए।

🛢️ कैसे पड़ा नाम ‘नीला ड्रम कांड’?

अपराध को छुपाने के लिए दोनों ने बाजार से एक नीला प्लास्टिक ड्रम खरीदा। उन्होंने सौरभ के शव के टुकड़ों को उस ड्रम में डाला और ऊपर से गीला सीमेंट भर दिया ताकि लाश की बदबू बाहर न आ सके। वे इस भारी-भरकम ड्रम को कहीं दूर ठिकाने लगाना चाहते थे, लेकिन सीमेंट जमने के कारण ड्रम इतना भारी हो गया कि मजदूर भी उसे उठा नहीं पाए। पकड़े जाने के डर से मुस्कान ने अपनी मां के सामने गुनाह कबूल कर लिया, जिन्होंने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दे दी।


⏳ हत्याकांड से लेकर फांसी के फैसले तक: पूरी टाइमलाइन

  • वर्ष 2016 (लव मैरिज): कॉलेज में मुलाकात के बाद मर्चेंट नेवी ऑफिसर सौरभ राजपूत और मुस्कान रस्तोगी ने प्रेम विवाह किया। दोनों की एक 5 साल की बेटी भी है।
  • 3 मार्च 2025 (सौरभ की घर वापसी): सौरभ लंदन से अपनी ड्यूटी पूरी कर मेरठ के ब्रह्मपुरी स्थित घर लौटा, जहां मुस्कान और प्रेमी साहिल ने उसकी हत्या की साजिश पहले से तैयार कर रखी थी।
  • 4 मार्च 2025 (जघन्य हत्याकांड): नशीली दवा देने के बाद सौरभ की हत्या की गई, शव के 15 टुकड़े किए गए और उसे सीमेंट से भरे नीले प्लास्टिक ड्रम में सील कर दिया गया।
  • मार्च 2025 (गुमराह करने की कोशिश): हत्या के बाद मुस्कान अपने प्रेमी साहिल के साथ घूमने चली गई और सौरभ के फोन से उसके परिवार को गुमराह करने वाले मैसेज भेजती रही।
  • मार्च 2025 (खुलासा और गिरफ्तारी): मुस्कान की मां की सूचना पर पुलिस ने ब्रह्मपुरी स्थित घर पर छापा मारा। सीमेंट से जमे नीले ड्रम को कटर से काटकर शव के टुकड़े बरामद किए गए और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
  • सितंबर 2025 (ट्रायल की शुरुआत): मामले की गंभीरता को देखते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। 13 महीनों के दौरान 126 सुनवाइयां हुईं और 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए。
  • 30 सितंबर 2026 (दोषी करार): मेरठ की जिला अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को हत्या व सबूत मिटाने का दोषी पाया।
  • 14 अक्टूबर 2026 (ऐतिहासिक फैसला): अदालत ने दोनों दोषियों—मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला—को फांसी (मृत्युदंड) की सजा सुनाई
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