Life Style

स्क्रीन टाइम कम करने के लिए अपनाएं 20 मिनट की ‘Green Therapy’

नई दिल्ली। अपनों के साथ बैठकर भी फोन में खोए रहना, लंच के दौरान लगातार काम के ई-मेल चेक करना और दोस्तों से बात करते हुए दूसरे चैट बॉक्स में मैसेज टाइप करना अब इंदौर के लोगों की आम आदत बन चुका है. अनजाने में ही इन स्क्रीन्स ने हमारे हर खाली पल पर पूरी तरह कब्जा कर लिया है. एक विश्वसनीय वैश्विक रिसर्च के अनुसार, एक आम नागरिक दिन भर में 200 से ज्यादा बार अपना फोन अनलॉक करता है. तकनीक का यह बढ़ता दखल अब शहर के कामकाजी युवाओं और परिवारों की मानसिक सेहत पर भारी पड़ रहा है.

रोजाना 8 घंटे से ज्यादा स्क्रीन पर बीत रहा वक्त, थम गई आउटडोर लाइफ

इंटरनेट की शुरुआत के दौर में लोग हफ्ते में बमुश्किल एक घंटा ऑनलाइन बिताते थे. लेकिन ताजा रिपोर्ट बताती है कि आज लोग हर दिन 8 घंटे से भी ज्यादा समय स्क्रीन को घूरते हुए बिता रहे हैं. यह आंकड़ा हमारे सोने या काम करने के कुल समय से भी अधिक है. इंदौर के प्रमुख आईटी हब, जैसे काम करने वाले पेशेवर अब खूबसूरत प्राकृतिक नजारों के बजाय अपने हाथों में मौजूद कांच की छोटी-सी स्क्रीन को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं. इससे अनिद्रा, चिड़चिड़ापन और लगातार थकान जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं.

स्टैनफोर्ड की रिसर्च का दावा: प्रकृति के बीच बिताए 20 मिनट करेंगे कमाल

इस गंभीर समस्या का इलाज बेहद आसान और मुफ्त है. इसके लिए किसी महंगी थेरेपी की जरूरत नहीं है. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा 449 अलग-अलग स्टडीज के एक मेगा-एनालिसिस में यह साबित हुआ है कि प्रकृति के बीच महज 10 से 20 मिनट बिताने से मानसिक सेहत में जादुई सुधार होता है. घर से बाहर हरियाली में निकलने पर शरीर में तनाव बढ़ाने वाला कॉर्टिसोल हार्मोन कम होता है, हार्ट रेट में सुधार होता है और मूड तुरंत बेहतर हो जाता है. इन जैविक बदलावों को खून और लार की जांच में भी मापा गया है.

स्थानीय विशेषज्ञों की राय और जमीनी हकीकत

“हमारे पास आने वाले डिप्रेशन और एंग्जायटी के 40% मामलों का सीधा संबंध ओवर-स्क्रीनिंग और डिजिटल ओवरलोड से है. दवाइयों से ज्यादा असरदार यह है कि लोग सुबह या शाम को कुछ समय बिना फोन के बिताएं.”
— वरिष्ठ मनोचिकित्सक, इंदौर

हफ्ते में 2 घंटे की ‘ग्रीन थेरेपी’: इंदौर के इन पार्कों में जा सकते हैं आप

मिशिगन यूनिवर्सिटी की एक अन्य रिसर्च कहती है कि प्रकृति के बीच थोड़ी देर टहलने से हमारी याददाश्त और फोकस में 20% तक का इजाफा होता है. इसके लिए आपको पहाड़ों पर जाने की जरूरत नहीं है. इंदौर के निवासी अपने नजदीकी पार्कों का रुख कर सकते हैं. स्थानीय पार्क में बिताया समय भी उतना ही असरदार है. हफ्ते में कुल दो घंटे की ‘ग्रीन थेरेपी’ मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए पर्याप्त है. अब समय आ गया है कि सोशल मीडिया स्क्रॉल करने के बहाने छोड़कर, लोग अपनी सेहत के लिए स्क्रीन बंद करें और खुली हवा में कदम बढ़ाएं.

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