Homeछत्तीसगढबकाया भुगतान न करने पर कोर्ट सख्त: डोंगरगांव नगर पंचायत की गाड़ियां...

बकाया भुगतान न करने पर कोर्ट सख्त: डोंगरगांव नगर पंचायत की गाड़ियां और AC कुर्क, अब DUDA कार्यालय की बारी

राजनांदगांव, 5 नवंबर 2026: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में बकाया राशि का भुगतान न करने पर न्यायालय ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट के आदेश पर डोंगरगांव नगर पंचायत की सरकारी संपत्तियों को कुर्क (जब्त) कर लिया गया है। इस कार्रवाई के तहत नगर पंचायत कार्यालय से फायर ब्रिगेड, क्रेन और ट्रैक्टर जैसी सरकारी गाड़ियों समेत दफ्तर के एसी (AC) तक जब्त कर लिए गए हैं। नगर पंचायत के बाद अब जिला शहरी विकास अभिकरण (DUDA) की चल संपत्तियों पर भी कुर्की की तलवार लटक रही है, जिससे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।

13.60 लाख रुपये के बकाया का है मामला

यह पूरा विवाद ‘सिंध एजेंसी’ के प्रोपराइटर और संबंधित सरकारी विभागों के बीच भुगतान को लेकर चल रहा है। इस मामले में सिविल एक्सीक्यूशन केस क्रमांक 19/2025 कोर्ट में दर्ज है। दस्तावेजों के मुताबिक, विभागों पर एजेंसी की कुल 13 लाख 60 हजार 406 रुपये 71 पैसे की राशि बकाया है। लंबे समय तक नोटिस के बाद भी जब भुगतान नहीं किया गया, तो तृतीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश (राजनांदगांव) की अदालत ने सख्त कदम उठाते हुए कुर्की का वारंट जारी कर दिया।

दफ्तर पहुंचे कोर्ट के अधिकारी, फायर ब्रिगेड और क्रेन जब्त

न्यायालय के आदेश के बाद 4 नवंबर को कोर्ट की टीम गवाहों के साथ डोंगरगांव नगर पंचायत कार्यालय पहुंची। टीम ने मौके पर मौजूद कई महत्वपूर्ण सरकारी संसाधनों को जब्त कर लिया, जिनमें शामिल हैं:

  • फायर ब्रिगेड और पानी के टैंकर
  • सरकारी ट्रैक्टर और क्रेन
  • वैक्यूम मशीन और हॉर्स गाड़ी
  • कार्यालय में लगे 3 एयर कंडीशनर (AC)

जब्त की गई इन सभी संपत्तियों को फिलहाल नगर पंचायत परिसर में ही सुरक्षित खड़ा करवाया गया है।

आज DUDA कार्यालय की संपत्तियां होंगी कुर्क

नगर पंचायत पर बड़ी कार्रवाई के बाद अब आज (गुरुवार) जिला कलेक्टोरेट परिसर में स्थित जिला शहरी विकास अभिकरण (DUDA) के कार्यालय की संपत्तियों को कुर्क करने की तैयारी है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, DUDA की चल संपत्तियों की सूची के आधार पर जब्ती की प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।

सरकारी कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

सरकारी कार्यालयों में कोर्ट की इस कुर्की ने प्रशासन की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर क्यों एक निजी एजेंसी का भुगतान इतने लंबे समय तक अटका कर रखा गया? इस लापरवाही के लिए कौन सा विभाग या अधिकारी जिम्मेदार है? सबसे बड़ा सवाल यह है कि जनता की सेवा और आपातकालीन कार्यों में इस्तेमाल होने वाले संसाधनों (जैसे फायर ब्रिगेड और क्रेन) की कुर्की की नौबत आने से अब आम जनता के जरूरी कामकाज कैसे पूरे होंगे?

फिलहाल कोर्ट की कार्रवाई जारी है और अब यह देखना होगा कि इस प्रशासनिक फजीहत के बाद प्रशासन बकाया राशि का भुगतान कब तक सुनिश्चित करता है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments