नई दिल्ली: अब होटल में चेक-इन करना हो, अस्पताल में भर्ती होना हो या फिर किसी गिग वर्कर की पहचान सत्यापित करनी हो, इसके लिए आधार कार्ड की फिजिकल फोटोकॉपी देने की जरूरत धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने अपनी डिजिटल व्यवस्था को और मजबूत करते हुए जनवरी से अब तक 300 संगठनों को अपने ऑफलाइन वेरिफिकेशन सिस्टम में शामिल कर लिया है। इस कदम से रोजमर्रा की सेवाओं में सहमति-आधारित डिजिटल पहचान सत्यापन का दायरा काफी बढ़ गया है।
यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब ‘आधार ऐप’ देश में काफी लोकप्रिय हो रहा है। इसके लगभग 7.5 करोड़ डाउनलोड हो चुके हैं और 86 लाख से ज्यादा लोग इसका इस्तेमाल आधार केंद्र जाए बिना अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर अपडेट करने के लिए कर रहे हैं।
सत्यापन को पेपरलेस बनाना मुख्य उद्देश्य
UIDAI द्वारा शामिल किए गए इन 300 संगठनों को ऑफलाइन वेरिफिकेशन सीकिंग एंटिटीज (OVSEs) के रूप में पंजीकृत किया गया है। इनमें हॉस्पिटैलिटी, हेल्थकेयर, शिक्षा, इवेंट्स, गिग इकॉनमी और उपभोक्ता सेवाएं देने वाले क्षेत्र प्रमुख रूप से शामिल हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कागजी दस्तावेज इकट्ठा करने की जगह डिजिटल सत्यापन अपनाना है, जिससे कागजी काम कम होगा और लोगों की निजी जानकारी के दुरुपयोग का जोखिम भी घटेगा।
कैसे काम करेगा यह नया सिस्टम?
- चुनिंदा जानकारी साझा करने की छूट: इस सिस्टम के तहत लोग अपनी सहमति देने के बाद ऐप के जरिए अपनी पहचान का विवरण साझा कर सकते हैं। वे यह चुन सकते हैं कि उन्हें पूरी जानकारी देनी है या केवल कुछ जरूरी विवरण।
- सुरक्षित रहेगा 12 अंकों का नंबर: इस डिजिटल प्रक्रिया में यूजर्स का 12 अंकों का विशिष्ट आधार नंबर सत्यापन करने वाले संगठन को नहीं भेजा जाता है।
- केंद्रीय डेटाबेस से जुड़ने की जरूरत नहीं: पहचान सत्यापित करने वाले संगठन को इसके लिए UIDAI के केंद्रीय डेटाबेस से सीधे जुड़ने की भी आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे डेटा लीक होने का खतरा खत्म हो जाता है।
निजी सेवाओं में बढ़ा इस्तेमाल, डेटा रहेगा सुरक्षित
यह विस्तार UIDAI के उन प्रयासों का हिस्सा है, जिसके तहत वह होटलों और अन्य सेवा प्रदाताओं को फोटोकॉपी के बजाय ऐप-आधारित डिजिटल पहचान प्रमाण (जैसे QR कोड और OTP) स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। पिछले साल अप्रैल में प्राधिकरण ने पहली 100 संस्थाओं को इससे जोड़ा था।
सत्यापन की इस नई पहल के अलावा लोग ऐप का इस्तेमाल अपनी निजी जानकारी अपडेट करने के लिए भी तेजी से कर रहे हैं। UIDAI के आंकड़ों के अनुसार, लोगों ने ऐप के जरिए 22.16 लाख बार अपना पता और 40.25 लाख बार अपना ईमेल अपडेट किया है। इसके साथ ही, सुरक्षा फीचर्स का उपयोग करते हुए ऐप में 4.6 करोड़ बार बायोमेट्रिक लॉक/अनलाॉक और 3.61 लाख बार डिजिटल लॉक/अनलाॉक ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए हैं।
UIDAI ने स्पष्ट किया कि यह विस्तार ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट’ के प्रावधानों के अनुरूप है, जो यूजर की सहमति लेने और डेटा संग्रह को सीमित करने पर जोर देता है। इससे अब स्मार्टफोन के जरिए आम लोगों के लिए जरूरी सेवाओं तक पहुंच बेहद आसान और सुरक्षित हो जाएगी।



