नई दिल्ली: दिवाली का त्योहार सनातन धर्म में मां लक्ष्मी के स्वागत और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना का सबसे विशेष अवसर माना जाता है। इस पावन दिन पर घरों में साफ-सफाई, दीपों की सजावट और माता लक्ष्मी व भगवान गणेश के विशेष पूजन की तैयारियां की जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की अमावस्या की रात को मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। ऐसा माना जाता है कि जो घर स्वच्छ, सुंदर और प्रकाश से जगमगाते हैं, माता लक्ष्मी वहां प्रवेश कर अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं।
आइए जानते हैं कि इस बार दिवाली पर मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और पूजा की सही व सरल विधि क्या है।
मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर की स्वच्छता है जरूरी
दिवाली से पहले पूरे घर की अच्छी तरह साफ-सफाई करने की परंपरा सदियों पुरानी है। शास्त्रों के अनुसार, स्वच्छता और सुंदरता को ही मां लक्ष्मी के आगमन का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन घर के मंदिर, मुख्य द्वार और पूजा स्थल को विशेष रूप से साफ और व्यवस्थित रखना चाहिए। मुख्य द्वार पर सुंदर रंगोली बनाना और दीपों से पूरे घर को रोशन करना बेहद शुभ माना जाता है।
लक्ष्मी-गणेश पूजन की सरल विधि
दिवाली की शाम को शुभ मुहूर्त में किसी पवित्र स्थान या लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। उस चौकी पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा को श्रद्धापूर्वक स्थापित करें। इसके बाद पूजा स्थल पर घी या तेल का दीपक जलाएं। भगवान को फूल, अक्षत (चावल), रोली, चंदन, धूप और मौसमी फल अर्पित करें। पूजा की शुरुआत में गंगाजल छिड़ककर पवित्रिकरण करें और हाथ में जल लेकर पूजा का संकल्प लें। इसके बाद पूरी श्रद्धा के साथ देवी-देवताओं के मंत्रों का जाप करें।
मां लक्ष्मी का प्रिय भोग और कमल का फूल
लक्ष्मी पूजन के दौरान माता रानी को मिठाई, खील-बताशे, मखाने, मौसमी फल और नारियल का भोग लगाने की विशेष परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कमल का फूल मां लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है, इसलिए कई स्थानों पर पूजा में कमल का फूल विशेष रूप से अर्पित किया जाता है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य और उपलब्धता के अनुसार सात्विक भोग तैयार कर माता को अर्पित कर सकते हैं।
दीपदान और आरती का विशेष महत्व
अंधकार पर प्रकाश की विजय और जीवन में सकारात्मकता लाने के प्रतीक के रूप में दिवाली पर दीपदान किया जाता है। पूजन संपन्न होने के बाद कपूर या घी के दीपक से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती उतारें। आरती के समय परिवार के सभी सदस्यों को एक साथ शामिल होना चाहिए और घर में सुख-शांति व समृद्धि बनाए रखने के लिए सामूहिक रूप से प्रार्थना करनी चाहिए।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
धार्मिक परंपराओं में केवल बाहरी साफ-सफाई ही नहीं, बल्कि मन की शुद्धता को भी महत्वपूर्ण माना गया है। दिवाली के शुभ अवसर पर श्रद्धा भाव से जरूरतमंद लोगों की सहायता और दान-पुण्य करना चाहिए। घर में प्रेमपूर्ण और शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखें। मां लक्ष्मी की आराधना का असली उद्देश्य केवल धन प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन में संतोष, सुख, सद्बुद्धि और वास्तविक समृद्धि का वास होना है।



