नई दिल्ली। दीपावली का महापर्व केवल दीप जलाने और मां लक्ष्मी की आराधना तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह दिन व्यापार और नई आर्थिक शुरुआत के लिए भी बेहद खास माना जाता है। इस अवसर पर गुजरात और महाराष्ट्र सहित देश के कई हिस्सों में व्यापारी वर्ग द्वारा ‘चोपड़ा पूजन’ की प्राचीन परंपरा निभाई जाती है। इसके तहत व्यापारी अपने पुराने हिसाब-किताब को बंद कर नई खाता-बही की विधिवत पूजा करते हैं और मां लक्ष्मी व भगवान गणेश से कारोबार में बरकत की कामना करते हैं।
क्या है चोपड़ा पूजन और इसका महत्व?
चोपड़ा पूजन को नए कारोबारी वर्ष की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी धन और वैभव की देवी हैं, जबकि भगवान गणेश बुद्धि और शुभता के प्रतीक हैं। व्यापारी अपने नए बही-खातों को इन दोनों देवी-देवताओं के समक्ष रखकर व्यापार में ईमानदारी, सफलता और निरंतर उन्नति का आशीर्वाद मांगते हैं।
शुभ-लाभ लिखने के पीछे की मान्यता
पूजन के दौरान नई बही के पहले पन्ने पर कुमकुम से स्वास्तिक का चिह्न बनाया जाता है और ‘शुभ-लाभ’ के साथ ‘श्री गणेशाय नमः’ लिखा जाता है। इसमें ‘शुभ’ का अर्थ मंगलकारी शुरुआत और ‘लाभ’ का अर्थ व्यापार में सकारात्मक परिणाम व मुनाफे से है। यह परंपरा व्यापारियों को सकारात्मक सोच और नेक संकल्प के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
चोपड़ा पूजन की सरल विधि:
- तैयारी: सबसे पहले पूजा स्थल को स्वच्छ करें और नई खाता-बही को साफ स्थान पर रखें।
- स्थापना: मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- पूजन: शुद्ध घी का दीपक जलाकर देवी-देवताओं को पुष्प, फल, मिठाई और अक्षत अर्पित करें।
- लेखन व आरती: नई बही पर स्वास्तिक व शुभ-लाभ लिखकर ईश्वर का स्मरण करें। अंत में आरती कर परिवार और व्यवसाय की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।



