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बिलासपुर कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल, शहर और ग्रामीण जिला कार्यकारिणी को मिली मंजूरी, 2028 चुनाव की तैयारी तेज

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने बिलासपुर शहर और ग्रामीण जिला कांग्रेस की नई कार्यकारिणियों को मंजूरी दे दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की स्वीकृति के बाद प्रदेश महामंत्री (संगठन) मलकित सिंह गैदू ने नियुक्ति आदेश जारी किए। नई कार्यकारिणी के गठन को आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

शहर कांग्रेस की नई कार्यकारिणी घोषित
जिला शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा की अनुशंसा पर गठित नई कार्यकारिणी में 31 पदाधिकारियों को महासचिव, सचिव और संयुक्त सचिव के पदों पर नियुक्त किया गया है।नई टीम में के. दीपक जायसवाल, संजीव ठाकुर, गोपाल ठाकुर, श्रीकांत जायसवाल, विवेक दुबे, डी. विक्रम सिंह (बंटी), भूषण कश्यप, राहुल श्रीवास, संजय यादव, डी. अजय तिवारी, दीपक तिवारी, वीरेंद्र दुबे, लक्ष्मी सिंह, अभिषेक यादव, गौरव श्रीवास्तव, अजय वर्मा, रजत राठौर, बृजेश सिंह, विनोद वर्मा, मुकेश कश्यप, विजय कुमार, विकास ठाकुर, मनोज कश्यप और शेख ताहिर सहित अन्य नेताओं को संगठन में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। प्रदेश संगठन ने सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को पार्टी की गतिविधियों को गति देने और संगठन को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

ग्रामीण जिला कांग्रेस की 51 सदस्यीय कार्यकारिणी को भी मंजूरी
प्रदेश कांग्रेस ने बिलासपुर ग्रामीण जिला कांग्रेस की 51 सदस्यीय नई कार्यकारिणी को भी स्वीकृति प्रदान कर दी है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री के प्रस्ताव पर प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के अनुमोदन के बाद प्रभारी महामंत्री मलकित सिंह गैदू ने स्वीकृति पत्र जारी किया।नई कार्यकारिणी में प्रवेश पटवा को कोषाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा 12 उपाध्यक्ष, 18 महामंत्री, 20 सचिव और 10 कार्यकारी सदस्यों को विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

2028 विधानसभा चुनाव पर कांग्रेस की नजर
प्रदेश कांग्रेस ने जिला अध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को तत्काल सूचना देकर संगठनात्मक गतिविधियों को तेज किया जाए। पार्टी का लक्ष्य संगठन सृजन शिविर के बाद बूथ स्तर तक संगठन का विस्तार करना और 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए मजबूत संगठनात्मक ढांचा तैयार करना है।कांग्रेस का मानना है कि नए पदाधिकारियों की नियुक्ति से संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी और आगामी चुनावों में पार्टी को इसका लाभ मिलेगा।

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